Geopolitics
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कनाडा के पीएम का बड़ा बयान: अमेरिकी दबदबे वाला वर्ल्ड ऑर्डर एक झूठ था
Navbharat Times
January 21, 2026•1 day ago
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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दावोस में कहा कि अमेरिकी प्रभुत्व वाला नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का दौर समाप्त हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि बड़ी शक्तियां अब आर्थिक एकीकरण को जबरदस्ती के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे वैश्वीकरण के लाभ कमजोर हो रहे हैं। उनके इस ईमानदार भाषण की काफी प्रशंसा हो रही है।
दावोस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया में नियम आधारित व्यवस्था को बर्बाद करने पर लगे हुए हैं। इसकी जगह वे वर्ल्ड ऑर्डर को 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' की तरफ धकेल रहे हैं। लेकिन ट्रंप की इस मनमानी के खिलाफ उनके सहयोगियों ने मोर्चा खोल दिया है। इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप को करारा जवाब दिया है। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बारे में अपना आकलन पेश करते हुए कहा कि अमेरिका के दौर वाली वैश्विक व्यवस्था का दौर अब खत्म हो गया है। कनाडाई प्रधानमंत्री ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से यह बात कही है।
कार्नी ने कहा, 'मैं सीधे-सीधे कहता हूं। हम बदलाव के दौर में नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव के बीच में हैं। पुरानी व्यवस्था वापस नहीं आने वाली है।' हालांकि, कार्नी ने अमेरिका या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने सीधे अमेरिकी दबदबे की तरफ इशारा किया। उन्होंने तर्क दिया कि बड़ी शक्तियां अब उसी आर्थिक एकीकरण को हथियार बना रही हैं जिसने कभी साझा समृद्धि का वादा किया था।
नियम आधारित व्यवस्था को बताया झूठ
कार्नी ने कहा, 'हम जानते थे कि इंटरनेशनल नियमों पर आधारित व्यवस्था की कहानी आंशिक रूप से झूठी थी। सबसे ताकतवर देश जब चाहें खुद को नियमों से छूट देते थे। व्यापार नियमों को असमान रूप से लागू किया जाता था। अंतरराष्ट्रीय कानून आरोपी और पीड़ित पर अलग-अलग तरह से लागू होता था।' हालांकि, उन्होंने कहा कि 'यह झूठ फायदेमंद था और दशकों तक इसी व्यवस्था से कनाडा जैसे देश समृद्ध हुए। अमेरिकी दबदबे ने सार्वजनिक सुविधाएं देने में मदद की, लेकिन अब यह सौदा काम नहीं कर रहा है।'
कार्नी ने दी दुनिया को चेतावनी
कार्नी ने चेतावनी दी कि आर्थिक एकीकरण का इस्तेमाल तेजी से जबरदस्ती के एक हथियार के तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, बड़ी ताकतों ने आर्थिक इंटीग्रेशन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। टैरिफ को दबाव बनाने के लिए, वित्तीय ढांचे को जबरदस्ती के लिए और सप्लाई चेन को कमजोरियों के तौर पर जिनका फायदा उठाया जा सके। इससे वैश्वीकरण के जरिए आपसी फायदे की मूल बात ही कमजोर हो रही है।
दावोस में कार्नी के भाषण की जमकर तारीफ हो रही है। विश्लेषक इसे साफगोई और ईमानदारी भरा भाषण कह रहे हैं। रिशप वॉट्स ने एक्स पर लिखा, ट्रूडो से बहुत बेहतर होने के अलावा, कार्नी ने जो साफगोई और ईमानदारी दिखाई है, वह सच में कमाल की है। ऐसा लगता है कि यह पश्चिमी दुनिया के लिए एक अहम पल है। यह एक ऐसा भाषणा हो सकता है, जो आने वाले सालों तक इतिहास में रेफरेंस पॉइंट बन जाएगा।
लेखक के बारे मेंविवेक सिंहविवेक सिंह, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ प्रिसिंपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका करीब 12 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) को कवर कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के घटनाक्रम में विशेष रुचि है। अमर उजाला देहरादून के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदा,एबीपी न्यूज से होते हुए नवभारत टाइम्स तक यह सफर जारी है। इस बीच न्यूज18 यूपी/उत्तराखंड के साथ टीवी की दुनिया और वीडियो न्यूज ऐप प्लेटफॉर्म के साथ भी काम किया। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है।... और पढ़ें
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