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कैलोरी डेफिसिट: 1 किलो फैट कम करने का असली फॉर्मूला
AajTak
January 20, 2026•2 days ago

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सेलेब्रिटी फिटनेस कोच समीर जौरा के अनुसार, वजन घटाने के लिए 'कैलोरी डेफिसिट' एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। यह तब होता है जब आप अपने शरीर द्वारा खर्च की गई कैलोरी से कम कैलोरी का सेवन करते हैं। 7700 कैलोरी का घाटा लगभग 1 किलोग्राम फैट कम करने के बराबर होता है। सुरक्षित रूप से, मेंटेनेंस कैलोरी से 20-25% की कमी की सलाह दी जाती है, जिससे स्वस्थ वजन घटाने में मदद मिलती है।
How do I calculate my calorie: वजन कम करने वाले, सेलेब्स या किसी भी फिटनेस कोच से आपने 'कैलोरी डेफिसिट' वर्ड जरूर सुना होगा. अब ऐसे में कुछ लोग तो समझ सकते हैं लेकिन कई लोग इस शब्द को नहीं समझ पाते. दरअसल, कैलोरी डेफिसिट असल में वही बेसिक फॉर्मूला है, जिस पर लगभग हर साइंटिफिक वेट लॉस प्लान काम करता है यानी दिनभर में जितनी कैलोरी बॉडी खर्च करती है, अगर आप उससे कम खा रहे हैं तो शरीर को एनर्जी के लिए जमे हुए बॉडी फैट जलाना पड़ता है और यहीं से वजन कम होना शुरू होता है.
न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कैलोरी डेफिसिट का मतलब खुद को भूखा रखना नहीं, बल्कि अपने मेंटेनेंस कैलोरीज से थोड़ी कम, लेकिन क्वालिटी और बैलेंस्ड कैलोरीज लेना है ताकि फैट तो कम हो लेकिन मसल्स और हेल्थ दोनों सुरक्षित रहें. कैलोरी डेफिसिट के गणित को समझने के लिए Aajtak.in ने सेलेब्रिटी फिटनेस कोच समीर जौरा से बात की जो कि फरहान अख्तर, कार्तिक आर्यन और शाहिद कपूर जैसे सेलेब्स को ट्रेनिंग दे चुके हैं. तो आइए समझते हैं कैलोरी डेफिसिट क्या है और ये कैसे काम करता है?
कैलोरी डेफिसिट क्या है?
कोच समीर ने Aajtak.in को बताया, 'कैलोरी डेफिसिट को सिंपल भाषा में समझें तो आप रोज जितनी कैलोरी बर्न करते हैं, उससे कम कैलोरी खाते हैं तो बॉडी में एक एनर्जी गैप बनता है जिसे भरने के लिए शरीर आपकी बॉडी में जमे हुए फैट को जलाकर एनर्जी लेने लगता है. यही प्रोसेस लंबे समय तक चालू रहे तो धीरे-धीरे वेट लॉस दिखने लगता है इसलिए बिना डेफिसिट के सिर्फ 'हेल्दी खाना' खाने से भी कई बार वजन नहीं घटता.'
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Healthline के मुताबिक, वेट लॉस की शुरुआत हमेशा अपने मेंटेनेंस कैलोरी समझने से होती है. मेंटेनेंस कैलोरी यानी कि वो कैलोरी जिस पर आपका वजन न ही कम होता है और ना ही बढ़ता है. ये एनर्जी सांस लेना, चलना-फिरना, डाइजेशन, हार्ट पंप करना और शरीर के अन्य काम करने में खर्च होती है. मेंटेनेंस कालोरी BMR, आप दिन भर में कितना चलते-फिरते हैं या एक्सरसाइज करते हैं और भोजन को पचाने में शरीर द्वारा खर्च की गई एनर्जी, मुख्यत: इन तीन चीजों पर निर्भर करती है.
कैलोरी डेफिसिट से वेट लॉस कैसे होता है?
कोच समीर बताते हैं, 'जब बॉडी को खाने से कम एनर्जी मिलती है तो वह सबसे पहले ग्लाइकोजन और उसके साथ थोड़ा वॉटर वेट कम होता है इसलिए शुरुआती दिनों में वजन थोड़ा तेजी से गिर सकता है. इसके बाद शरीर धीरे-धीरे स्टोर्ड फैट को एनर्जी की तरह प्रयोग करने लगता है, जिससे फैट लॉस होता है और लंबे समय में बॉडी कंपोजिशन यानी फैट और मसल्स का बैलेंस बेहतर हो सकता है.'
रिसर्च यह भी बताती हैं कि मॉडरेट कैलोरी रेस्ट्रिक्शन न सिर्फ वजन घटाने में मदद करती है बल्कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हो सकती है.
कितना कैलोरी डेफिसिट सेफ माना जाता है?
कोच समीर से जब पूछा गया कि यदि किसी को वेट लॉस करना है तो वो कितना कैलोरी डेफिसिट में रह सकता है तो उन्होंने बताया, 'ज्यादातर हेल्दी एडल्ट्स के लिए मेंटेनेंस कैलोरी से लगभग 20–25 प्रतिशत तक का डेफिसिट आम तौर पर सेफ और सस्टेनेबल माना जाता है. इसका मतलब है कि अगर किसी को वजन मेंटेन करने के लिए करीब 2000 कैलोरी चाहिए तो 300-500 कैलोरी डेफिसिट में रहकर वो 1500 से 1700 कैलोरीज रोज ले सकता है.'
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'लेकिन ध्यान रखें कभी भी बहुत ज्यादा कैलोरी डेफिसिट खासकर 1200 कैलोरी से नीचे जाना, लंबे समय तक चलने पर हार्मोन असंतुलन, मेटाबॉलिज्म स्लो होने और न्यूट्रिएंट डेफिशिएंसी का रिस्क बढ़ा सकता है.'
हेल्दी कैलोरी डेफिसिट कैसे बनाएं?
कोच समीर ने कहा, 'सबसे पहले अपनी मेंटेनेंस कैलोरी कैलकुलेट करें और फिर उसमें से 300–500 कैलोरी माइनस करें. डेफिसिट के लिए आप सिर्फ खाना कम करने की जगह हल्की–फुल्की फिजिकल एक्टिविटी या वॉक बढ़ाना, शुगरी ड्रिंक्स की जगह पानी या बिना शक्कर वाली चाय लेना, प्लेट में रिफाइंड कार्ब्स की जगह होल ग्रेन्स व प्रोटीन बढ़ाना ज्यादा बेहतर और सस्टेनेबल स्ट्रैटेजी मानी जाती है.'
'स्लीप, स्ट्रेस, हाइड्रेशन और ईटिंग स्पीड जैसा बिहेवियर भी कैलोरी बैलेंस और वेट लॉस रिजल्ट पर बड़ा असर डालता है, इसलिए सिर्फ डाइट चार्ट, लेकिन लाइफस्टाइल में कोई बदलाव न करने से रिजल्ट धीम हो सकते हैं या रुक भी सकते हैं.'
वजन घटाना (Weight Loss): मेंटेनेंस कैलोरी से कम खाना (Calorie Deficit)
वजन बढ़ाना (Weight Gain): मेंटेनेंस कैलोरी से ज्यादा खाना (Calorie Surplus)
वजन स्थिर रखना: मेंटेनेंस कैलोरी के बराबर खाना
वजन कम करने के लिए और फैट लॉस के लिए 2 तरीके हैं, पहला सिर्फ डाइट से और दूसरा डाइट + एक्सरसाइज से. एक्सपर्ट, न्यूट्रिशन एक्सपर्ट हमेशा डाइट और एक्सरसाइज के कॉम्बिनेशन से वेट लॉस करने की सलाह देते हैं. आइए दोनों को समझते हैं...
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पहला तरीका, सिर्फ डाइट से:
सिर्फ डाइट से: यदि आप सिर्फ डाइट से वजन कम करना चाहते हैं तो आप 500 कैलोरी डेफिसिट में रहकर बिना एक्सरसाइज के भी 15-16 दिन में 1 किलो फैट लॉस कर लेंगे.
दूसरा तरीका (डाइट + एक्सरसाइज से, सबसे बेहतर तरीका):
यदि आप डाइट के साथ फिजिकल एक्टिविटी करते हैं तो आप 1700 कैलोरी खाकर भी अपना 1 किलो फैट 15.4 दिन में कम कर सकते हैं. इसके लिए आप 300 कैलोरीज मेंटेनेंस कैलोरी से कम लें और 200 कैलोरी फिजिकल एक्टिविटी से बर्न कर दीजिए. यानी कि आपका कैलोरी डेफिसिट तब में भी 500 का ही होगा. लेकिन डाइट और एक्सरसाइज दोनों मिलाकर कैलोरी डेफिसिट बनाने से आपका शरीर अधिक फिट और टोंड दिखेगा.
तो आइए पहले मेंटेनेंस कैलोरी निकालना सीखते हैं और उसके बाद कैलोरी डेफिसिट निकालते हैं.
मेंटनेंस कैलोरी निकालने का तरीका
मेंटेनेंस कैलोरी निकालने का सबसे आसान तरीका एक साधारण फॉर्मूला है और वो है, 'BMR × एक्टिविटी = मेंटेनेंस कैलोरी'
बिल्कुल एक्सरसाइज नहीं (Sedentary): बीएमआर × 1.2
हफ्ते में 1-3 दिन एक्सरसाइज (Lightly Active): बीएमआर × 1.375
हफ्ते में 3-5 दिन एक्सरसाइज (Moderately Active): बीएमआर × 1.55
रोजाना एक्सरसाइज (Very Active): बीएमआर × 1.725
उदाहरण:
1 किलो फैट में करीब 7700 कैलोरीज होती हैं. मान लेते हैं कि वह व्यक्ति 500 कैलोरी रोजाना कम ले रहा है यानी 2000 की जगह 1500 कैलोरी खा रहा है.
यदि वह रोजाना 500 कैलोरीज कम खा रहा है तो वो करीब 15 से 16 दिन में 1 किलो फैट लॉस करेगा. {7700 (1 किलो फैट)÷ 500 (कैलोरी डेफिसिट) = 15.4. दिन}
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वहीं यदि वह रोजाना 1700 कैलोरी ले रहा है तो वो 25-26 दिन में 1 किलो फैट लॉस करेगा. {7700 (1 किलो फैट)÷ 300 (कैलोरी डेफिसिट) = 25.6 दिन}
यदि किसी को देखना है कि वो कैलोरी डेफिसिट में रहकर कितने दिन में फैट लॉस करेगा तो नीचे दिया हुआ फॉर्मूला इस्तेमाल कर सकता है.
7700÷कैलोरी डेफिसिट = 1 किलो फैट लॉस में लगने वाले दिन
एक्सट्रीम कैलोरी डेफिसिट के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?
कोच ने चेतावनी देते हुए कहा, 'मेंटेनेंस कैलोरी से बहुत अधिक कैलोरी कम खाना (जैसे 1000 कैलोरी से नीचे) या तेज वेट लॉस के चक्कर में एक्सट्रीम डेफिसिट करने से बॉडी पर बुरा असर पड़ सकता है, जैसे लगातार थकान, न्यूट्रिएंट की कमी (आयरन, विटामिन B12, मैग्नीशियम आदि) से एनीमिया, मसल्स लॉस और कमजोरी. इससे हार्मोन असंतुलन भी होता है.'
'महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, फर्टिलिटी कम हो सकती है, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन घटकर लिबिडो और इरेक्टाइल फंक्शन प्रभावित हो सकता है, जबकि स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ने से स्लीप डिस्टर्ब, मूड स्विंग्स और इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है.'
'लंबे समय तक ऐसा चलने पर मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है, बोन डेंसिटी घटकर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है, हार्ट रेट अनियमित हो सकता है और यहां तक कि गॉलस्टोन्स या कार्डियक प्रॉब्लम्स का रिस्क भी हो जाता है'
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रिसर्च बताती हैं कि मिनेसोटा स्टार्वेशन एक्सपेरिमेंट जैसे केस में एक्सट्रीम रेस्ट्रिक्शन से डिप्रेशन, चक्कर, एडीमा और यहां तक कि सुसाइडल थॉट्स तक देखे गए हैं.
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