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वेलफेयर बोर्ड के बिना बिल्डिंग वर्कर्स सेस नहीं: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Live Law Hindi
January 20, 20262 days ago
अगर वेलफेयर बोर्ड नहीं बने हैं तो डेवलपर्स से बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन वर्कर्स सेस नहीं वसूला जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन नहीं हो जाता, तब तक डेवलपर्स से बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स सेस नहीं वसूला जा सकता। कोर्ट ने NHAI की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वेलफेयर बोर्ड के गठन के बिना सेस का संग्रह या उपयोग संभव नहीं है।

इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (20 जनवरी) को कहा कि बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (रेगुलेशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस) एक्ट, 1996 के तहत कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के लिए वेलफेयर बोर्ड बनने तक बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस एक्ट, 1996 के तहत डेवलपर्स से कोई सेस नहीं वसूला जा सकता। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की अपील खारिज करते हुए कहा, "...वेलफेयर बोर्ड का गठन BOCW एक्ट और सेस एक्ट को लागू करने के लिए बहुत ज़रूरी है। ऐसे वेलफेयर बोर्ड के गठन से पहले इससे जुड़ा सेस लगाया या वसूला नहीं जा सकता था।" बता दें, दिल्ली हाईकोर्ट ने NHAI को ठेकेदारों के बिलों से काटे गए सेस को वापस करने का निर्देश देने वाले आर्बिट्रल अवॉर्ड को सही ठहराया था, भले ही BOCW एक्ट के तहत वेलफेयर बोर्ड अभी तक गठित नहीं हुए। बेंच NHAI के लिए हाईवे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने वाले ठेकेदारों के पक्ष में दिए गए आर्बिट्रल अवॉर्ड से जुड़े कई सिविल अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। विवाद इस बात पर केंद्रित था कि क्या NHAI द्वारा ठेकेदारों के बिलों से काटा गया सेस कॉन्ट्रैक्ट के तहत सही था और क्या ठेकेदार रिम्बर्समेंट के हकदार हैं। आर्बिट्रल अवॉर्ड सही ठहराते हुए, जिसमें NHAI को ठेकेदार के बिल से काटी गई सेस की रकम वापस करने का निर्देश दिया गया, जस्टिस संजय कुमार द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि BOCW Act एक वेलफेयर कानून है, जिसका मकसद कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के अधिकारों और शर्तों की रक्षा करना है, जबकि सेस एक्ट इसका पूरक है, जो वेलफेयर बोर्ड को फंड देने के लिए वित्तीय तंत्र प्रदान करता है। BOCW Act की धारा 18 के तहत वेलफेयर बोर्ड के गठन के बिना सेस का कोई सार्थक संग्रह या उपयोग नहीं हो सकता। कोर्ट ने सेंट्रल गवर्नमेंट, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की BOCW एक्ट को लागू न करने के लिए आलोचना करते हुए कहा, "यह साफ है कि सेंट्रल गवर्नमेंट या इस देश के राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों ने BOCW Act और सेस एक्ट के प्रावधानों को लागू करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए, जब तक कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया गया।" कोर्ट ने कहा, "ऐसी मशीनरी की गैर-मौजूदगी में सेस लगाने और इकट्ठा करने का सवाल तार्किक रूप से नहीं उठता है।" साथ ही यह भी कहा, "BOCW Act और सेस एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता की पूरी ज़िम्मेदारी अधिकारियों, यानी सेंट्रल गवर्नमेंट और संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों की है।" अपील खारिज कर दी गई और NHAI को निर्देश दिया गया कि वह आर्बिट्रल अवॉर्ड के संबंध में ठेकेदार को देय राशि में से एडजस्ट की गई राशि, साथ ही उक्त अवॉर्ड के अनुसार देय ब्याज के साथ जारी करे।

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