Thursday, January 22, 2026
Geopolitics
20 min read

रॉयल मिंट कोर्ट में चीन के मेगा दूतावास को ब्रिटेन की मंजूरी: अमेरिका की चिंता

News18 Hindi
January 21, 20261 day ago
ब्रिटेन ने रॉयल मिंट कोर्ट में चीन के मेगा दूतावास को मंजूरी दी

AI-Generated Summary
Auto-generated

ब्रिटेन ने रॉयल मिंट कोर्ट में चीन के मेगा दूतावास के निर्माण को मंजूरी दे दी है, जो पहले ब्रिटिश सिक्के बनाने का स्थल था। यह फैसला अमेरिका और कुछ देशों द्वारा चिंता व्यक्त किए जाने के बावजूद लिया गया है, जो जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की आशंका जता रहे हैं। यह कदम ग्रीनलैंड मुद्दे पर अमेरिका-यूरोप तनाव के बीच आया है।

जहां बनते थे ब्रिटेन के सिक्के, वहां अब ड्रैगन का राज! लंदन में चीन के मेगा दूतावास से क्यों डरा अमेरिका? Written by : ऐश्वर्य कुमार राय Agency:News18India Last Updated:January 21, 2026, 18:47 IST ब्रिटेन में चीन अब छोटे दूतावास की बजाय अब रॉयल मिंट कोर्ट में मेगा दूतावास बनाएगा. ये रॉयल मिंट वही जगह है, जहां 50-60 साल पहले तक ब्रिटिश सिक्के बना करते थे. चीन ने 2018 में इस जगह को खरीद लिया था. हालांकि देश के अंदर से लेकर अमेरिका तक चीन को यह तोहफा दिए जाने को लेकर आगाह कर रहे हैं. ग्रीनलैंड मामले पर ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद यह बड़ा कदम माना जा रहा है. Chinese Embassy in UK: दुनिया में इस समय कमाल की जियोपॉलिटिक्स चल रही है. देशों के बीच आपसी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मजेदार लेखा-जोखा चल रहा है. जिगरी दोस्तों में खींचातानी नजर आ रही है तो वहीं कट्टर विरोधी आपस में हाथ मिलाते नजर आ रहे हैं. कुछ ऐसा ही ब्रिटेन की धरती पर चल रहा है. यहां चीन एक विशालकाय दूतावास तैयार कर रहा है. छोटे दूतावास की बजाय अब रॉयल मिंट कोर्ट में मेगा दूतावास बनेगा. ये रॉयल मिंट वही जगह है, जहां 50-60 साल पहले तक ब्रिटिश सिक्के बना करते थे. चीन ने 2018 में इस जगह को खरीद लिया था. विरोध के लंबे दौर के बाद अब इसे मंजूरी मिली है. हालांकि देश के अंदर से लेकर अमेरिका तक चीन को यह तोहफा दिए जाने को लेकर आगाह कर रहे हैं. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ग्रीनलैंड के मसले को लेकर अमेरिका ने ब्रिटेन सहित कुछ यूरोपीय देशों पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है. आखिर यह पूरा मामला क्या है? आइए समझते हैं. लंदन की अहम जगह पर चाइनीज ड्रैगन के सुपर दूतावास को ब्रिटेन सरकार के मंत्री स्टीव रीड ने औपचारिक रूप से मंजूरी दी है. ब्रिटेन ने यह फैसला कई बार की देरी और कानूनी पेंचीदगी के बाद लिया है. आलोचकों का कहना है कि चीन का बड़ा दूतावास यहां जासूसी का अड्डा बन सकता है. वहीं कुछ लोगों ने नए चीनी दूतावास के अंडरग्राउंड फाइबर ऑप्टिक केबल्स के बहुत पास होने को लेकर आपत्ति जताई है. यहां से लंदन के वित्तीय इलाकों के बीच संवेदनशील जानकारी भेजी जाती है. हालांकि ब्रिटेन की MI-5 और MI6 जैसी सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे की किसी आशंका से इनकार किया है. गौर करने लायक बात है कि यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ग्रीनलैंड के मुद्दे को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव की स्थिति है. यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को सपॉर्ट करने की वजह से ब्रिटेन सहित 8 यूरोपीय देशों पर एक फरवरी से 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर इस महीने चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं. साल 2018 के बाद इंग्लैंड के पीएम की यह पहली चीनी यात्रा होगी. लंदन में बड़ा दूतावास क्यों? ब्रिटेन की सरकार ने जनवरी 2026 में चीन को लंदन में एक नया और विशाल दूतावास (Mega Embassy) बनाने की मंज़ूरी दे दी है जो यूरोप के अंदर सबसे बड़ा चीनी दूतावास माना जाएगा. यह रॉयल मिंट कोर्ट नामक ऐतिहासिक स्थल पर बनाया जाएगा, जिसे चीन ने 2018 में लगभग 225–255 मिलियन पाउंड (करीब 300 मिलियन डॉलर) में खरीद लिया था. भारतीय मुद्रा के हिसाब से 27 अरब 32 करोड़ रुपये की कीमत है. 1967 तक रॉयल मिंट में द ग्रेट ब्रिटेन के सिक्के बना करते थे. चीन ने लंदन में जमीन क्यों खड़ी थी? चीन ने 2018 में रॉयल मिंट कोर्ट की संपत्ति खरीदी. यह काम पहले से मौजूद लंदन के दूतावास की जगह बदलने और बड़ा दूतावास बनाने के इरादे से हुआ. यह क्षेत्र टॉवर ऑफ लंदन के पास है. यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसके आसपास वित्तीय और संचार नेटवर्क मौजूद हैं. चीन की योजना थी कि पुराने और छोटे दूतावास की जगह एक विशाल परिसर बनाकर सभी कार्य एक ही जगह से संचालित किए जाएं. इसमें ऑफिस, आवास, सांस्कृतिक केंद्र और अन्य सुविधाएँ शामिल हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि जमीन खरीदने का मकसद दीर्घकालिक राजनयिक आधार स्थापित करना था, ना कि सिर्फ निवेश करना. अब क्यों दूतावास बना रहा है? लंदन में चीन के हाल के अनुमोदन के कारणों को समझने के लिए दो मुख्य कारकों पर ध्यान देना ज़रूरी है. पहला है- राजनयिक और आर्थिक हित. चीन चाहता है कि लंदन में उसका दूतावास बड़ा और आधुनिक हो, ताकि वह ब्रिटेन के साथ राजनयिक, आर्थिक, सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूती से संचालित कर सके. बड़े परिसर में सभी विभागों को एक ही जगह मिल सकेगा, जिससे प्रशासनिक कामकाज और प्रचार-प्रसार करना आसान होगा. इसमें दूसरी वजह है- राजनीतिक संदेश और प्रतीकात्मक महत्व. कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह चीन की वैश्विक उपस्थिति और प्रभाव का प्रतीक है. वे बड़े और महत्वपूर्ण देशों में अपने रूख को दर्शाना चाहते हैं. लंदन जैसे शहर में बड़ा दूतावास बनने से चीन को एक मजबूत राजनयिक मंच मिल सकता है. चीन की खुफिया गतिविधियां अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ब्रिटेन को सलाह दी थी कि इस दूतावास में भारी खुफिया और निगरानी गतिविधियाँ हो सकती हैं. रिपोर्ट्स में कहा गया कि प्रस्तावित दूतावास के तहख़ानों में 208 गुप्त कमरे हो सकते हैं, जिससे चीन को डेटा निगरानी का अवसर मिल सकता है. ऐसा कहा गया कि यह ब्रिटिश नेटवर्क संचार लाइनों के नज़दीक है, जिससे संवेदनशील डेटा तक पहुंच के जोखिम पैदा हो सकते हैं. ब्रिटेन में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं ब्रिटिश सांसदों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि चीन, विशाल दूतावास को जासूसी केंद्र के रूप में इस्तेमाल कर सकता है. विशेष रूप से उस क्षेत्र के आसपास आर्थिक और साइबर गतिविधियों पर. स्थानीय निवासियों और मानवाधिकार समूहों ने भी विरोध जताया कि यह स्थल हांगकांग मामले पर चीन के आलोचकों के लिए अशांतिपूर्ण परिस्थितियाँ पैदा कर सकता है. ब्रिटिश सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि सभी जोखिमों का मूल्यांकन किया गया और नियंत्रण उपाय लागू किए गए हैं. इसलिए अब मंज़ूरी दी जा सकती है. दूतावासों की संख्या के मामले में चीन दुनिया में सबसे बड़े राजनयिक नेटवर्क वाला देश है, जिसके दुनिया भर में सबसे ज़्यादा दूतावास और मिशन हैं. इसके पीछे संयुक्त राज्य अमेरिका और तुर्की जैसे देशों की भी लंबी सूची है. दुनिया में सबसे बड़ा दूतावास भवन इस समय अमेरिका का दूतावास, बगदाद (इराक) दुनिया में है. यह सबसे बड़ा दूतावास परिसर माना जाता है जो लगभग 104 एकड़ (42 हेक्टेयर) में फैला हुआ है. वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां चीन और पश्चिमी देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और टेक्नोलॉजी को लेकर प्रतिद्वंदिता बढ़ रही है. उदाहरण के तौर पर पर अमेरिका और ब्रिटेन दोनों ने चीन को संभावित साइबर और स्पाई जोखिम के रूप में देखा है. हालांकि ब्रिटेन में सरकार का कहना है कि राजनयिक संवाद और सहयोग भी ज़रूरी है, खासकर चीन जैसे बड़े आर्थिक साझेदार के साथ में. इसलिए सुरक्षा चिंताओं के बावजूद मंज़ूरी दी गई है. About the Author ऐश्वर्य कुमार राय ऐश्वर्य कुमार राय नेटवर्क 18 ग्रुप में जर्नलिस्ट हैं. वह यहां डेप्युटी न्यूज एडिटर के तौर पर देश और दुनिया के घटनाक्रमों पर विस्तृत रिपोर्ट्स कवर करते हैं. वह पाठकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फैक्ट्स और र...और पढ़ें Click here to add News18 as your preferred news source on Google. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Location : New Delhi,New Delhi,Delhi First Published : January 21, 2026, 18:22 IST homeknowledge लंदन में ड्रैगन राज से सहमे ट्रंप! चीन के मेगा दूतावास से यूरोप में खलबली और पढ़ें

Rate this article

Login to rate this article

Comments

Please login to comment

No comments yet. Be the first to comment!
    चीन का मेगा दूतावास: ब्रिटेन में मंजूरी, अमेरिका चिंतित