Geopolitics
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BRICS देशों के साथ भारत का डॉलर को चुनौती देने का दमदार प्लान
Jagran
January 19, 2026•3 days ago

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भारत ने ब्रिक्स देशों की डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य सीमा पार लेनदेन को तेज, सस्ता और डॉलर पर निर्भरता कम करना है। 2026 में भारत की मेजबानी में होने वाले शिखर सम्मेलन में इस पर चर्चा होगी। यह वैश्विक भुगतान व्यवस्था में बदलाव ला सकता है।
नई दिल्ली| भारत ने अमेरिकी डॉलर की 'अकड़' तोड़ने और दुनिया की पेमेंट व्यवस्था को बेहतर बनाने का बड़ा प्लान बनाया है। भारत ने डॉलर के दबदबे को चुनौती देने वाला ऐसा कदम सुझाया है, जो वैश्विक व्यापार और पर्यटन भुगतान की दिशा बदल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI proposes BRICS digital currencies) ने प्रस्ताव रखा है कि ब्रिक्श देशों की डिजिटल करेंसी (BRICS digital currency link) को आपस में जोड़ा जाए, ताकि सीमा पार लेनदेन तेज, सस्ता और सीधे हो सके।
यह प्रस्ताव 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडे में लाने की सिफारिश की गई है। अगर योजना पर मुहर लगी, तो पहली बार ब्रिक्स डिजिटल करेंसी नेटवर्क पर काम शुरू होगा, जिससे डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में ठोस पहल मानी जा रही है।
इस साल ब्रिक्स की मेजबानी करेगा भारत
भारत इस साल होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन (India BRICS 2026 summit) की मेजबानी करेगा। अगर यह सिफारिश स्वीकार होती है, तो ब्रिक्स सदस्यों की डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का प्रस्ताव पहली बार आधिकारिक तौर पर रखा जाएगा। BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, जबकि हाल के वर्षों में यूएई, ईरान और इंडोनेशिया जैसे नए देश भी जुड़े हैं।
BRICS को 'एंटी अमेरिकन' बता चुके ट्रंप
यह पहल ऐसे समय आ रही है जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं और डॉलर को बायपास करने की कोशिशों पर अमेरिका कड़ी नजर रखे हुए है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोल्ड ट्रंप (Donald Trump) पहले ही ब्रिक्स को 'एंटी-अमेरिकन' बता चुके हैं और इसके सदस्यों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दे चुके हैं।
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भारतीय डिजिटल करेंसी को CBCD से जोड़ने में दिचलस्पी
RBI का यह प्रस्ताव 2025 में रियो डी जनेरियो में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की उस घोषणा को आगे बढ़ाता है, जिसमें सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की बात कही गई थी। RBI पहले भी भारत के डिजिटल रुपए को अन्य देशों की CBDC से जोड़ने में रुचि जता चुका है, हालांकि उसने साफ किया है कि इसका मकसद डी-डॉलराइजेशन (De-dollarization BRICS 2026) नहीं है।
डिजिटल करेंसी पर पायलट प्रोजेक्ट चला रहे ब्रिक्स देश
फिलहाल किसी भी ब्रिक्स देश ने अपनी डिजिटल करेंसी को पूरी तरह लॉन्च नहीं किया है, लेकिन सभी प्रमुख सदस्य पायलट प्रोजेक्ट चला रहे हैं। भारत की ई-रुपी को दिसंबर 2022 में लॉन्च किया गया था और अब तक करीब 70 लाख रिटेल यूजर इससे जुड़ चुके हैं। RBI ने ऑफलाइन पेमेंट, सरकारी सब्सिडी में प्रोग्रामेबल ट्रांसफर और फिनटेक वॉलेट की सुविधा देकर इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, डिजिटल करेंसी को जोड़ने के लिए टेक्नोलॉजी इंटरऑपरेबिलिटी, गवर्नेंस नियम और व्यापार असंतुलन निपटाने जैसे मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। संभावित असंतुलन से निपटने के लिए सेंट्रल बैंकों के बीच विदेशी मुद्रा स्वैप व्यवस्था और साप्ताहिक या मासिक सेटलमेंट जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है।
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