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बीएमसी मेयर का असली खेला: महायुति की जीत के बाद कौन संभालेगा कमान?

Jagran
January 19, 20263 days ago
BMC मेयर के लिए अब होगा असली खेला! कौन किससे मिलाएगा हाथ, किसको मिलेगी मात? पूरा सियासी गणित

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बीएमसी चुनाव में महायुति की जीत के बावजूद मेयर पद को लेकर भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट में खींचतान जारी है। शिंदे गुट 29 सीटें जीतकर मेयर पद पर अपना दावा कर रहा है, जबकि भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है। विभिन्न सियासी समीकरणों और संभावित गठबंधनों पर चर्चा चल रही है, जिससे मेयर का चुनाव जटिल हो गया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीएमसी चुनाव के नतीजे 16 दिसंबर को ही आ चुके हैं, महायुति ने शानदार जीत हासिल की है। हालांकि अभी तक नए मेयर को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है। 227 सीटों वाली बीएमसी में बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट को 89 और 29 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत मिला है। दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना 65 और, उनकी सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को 6 सीट पर जीत मिली है। कांग्रेस के खाते में 24 सीटें आई हैं। बीएमसी चुनाव के नतीजों से इतना तो साफ हो गया है कि बीएमसी में इस बार महायुति का मेयर बनने जा रहा है। नतीजों के बाद से ही शिवसेना (शिंदे) और बीजेपी के बीच मेयर पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। यही कारण है कि अभी तक मेयर के नाम पर सहमति नहीं बन पाई है। 29 सीटें जीतकर शिंदे की पार्टी चाहती है कि मेयर उनकी पार्टी से बने, लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है। अब ऐसे में कई संभावित सियासी समीकरण नजर आ रहे हैं। आइए देखते हैं.... महायुति- बीएमसी का मेयर महायुति का बने, इसके लिए समीकरण तो यही है कि बीजेपी, शिवसेना शिंदे और एनसीपी अजीत पवार मिलकर मेयर चुनें। लेकिन जिस तरह की होटल पॉलिटिक्स देखने को मिल रही है, उसे देखकर ये आसान नहीं होने जा रहा है। महाविकास अघाड़ी + शिंदे- एक विकल्प ये भी है कि एकनाथ शिंदे बीजेपी से नाता तोड़कर वापस उद्धव ठाकरे के साथ आ जाएं, पर फिलहाल इसकी संभावना न के बराबर हैं। बीजेपी+ उद्धव- एक संभावना यह भी है कि बीजेपी और उद्धव ठाकरे एक साथ आ जाएं तो बहुमत के आंकड़े से बहुत आगे निकल जाएंगे। लेकिन बीजेपी उद्धव के साथ जाने के विकल्प पर तभी जाना पसंद करेगी जब शिंदे अड़ जाएं, या उन्हें अपने पार्षद टूटने का डर हो। ऐसे में संभावना बनती है कि अगर शिंदे बीजेपी से अलग होकर उद्धव ठाकरे, शरद पवार और कांग्रेस के साथ आ जाते हैं, तो बीजेपी के लिए बीएमसी मेयर की राह मुश्किल हो जाएगी। इसके अलावा शिंदे के पार्षद मेयर चुनाव के दौरान वोटिंग में हिस्सा न लेकर बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं, क्योंकि ऐसा करने से सदन का जादुई आंकड़ा नीचे तो गिर जाएगा लेकिन बीजेपी की पहुंच से दूर। क्या फिर साथ आएंगे पुराने साथी? कहते हैं कि सियासत में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। बीएमसी मेयर के लिए एक संभावना यह भी है कि बीजेपी को रोकने के लिए शिवसेना शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) किसी शिवसैनिक के नाम पर समझौता कर लें। साथ ही कांग्रेस उन्हें समर्थन दे दे। मौजूदा सियासी हालातों को देखते हुए संभव तो नहीं दिख रहा है, पर हां एक संभावना यह भी है। हमारे पास सिर्फ 6 सीटों की कमी- संजय राउत बीएमसी मेयर पर जारी अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत का कहना है कि मुंबई के महापौर पद की दौड़ अभी खत्म नहीं हुई है। राउत का कहना है कि सहयोगियों की मदद से शिवसेना (यूबीटी) की संख्या 108 हो गई है, बहुमत के आंकड़े से हम सिर्फ 6 कदम दूर हैं।

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    बीएमसी मेयर चुनाव: महायुति की जीत, कौन बनेगा मेयर?