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भारत अपर-मिडिल-इनकम ग्रुप में शामिल: चीन के साथ नया मील का पत्थर

Navbharat Times
January 19, 20263 days ago
Indian Economy: चीन इस खास कुनबे में शामिल, भारत भी मारने वाला है एंट्री, ये मील का पत्‍थर कितनी दूर?

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एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2030 तक 'उच्च-मध्यम आय' वाला देश बन जाएगा, चीन और इंडोनेशिया के साथ शामिल होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। यह अनुमान प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी वृद्धि पर आधारित है।

नई दिल्ली: भारत एक और मील का पत्‍थर हासिल करने वाला है। साल 2030 तक वह अपर-मिडिल-इनकम ग्रुप यानी 'उच्च-मध्यम आय' वाला देश बन जाएगा। इस तरह वह चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ खड़ा होगा। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। यह अनुमान भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) में लगातार बढ़ोतरी और जीडीपी के विस्तार पर आधारित है। एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अगले 4 साल में यानी 2030 तक प्रति व्यक्ति आय 4000 डॉलर तक पहुंचने की राह पर है। इससे देश अपर-मिडिल-इनकम ग्रुप में शामिल हो जाएगा। वर्तमान वर्गीकरण के अनुसार, वह चीन और इंडोनेशिया के साथ अपनी जगह बनाएगा। यह भारत की इनकम प्रोफाइल में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। देशों को चार कैटेगरी में बांटता है व‍िश्‍व बैंक विश्व बैंक देशों को उनकी प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के आधार पर चार कैटेगरी में बांटता है। इनमें लो इनकम (निम्न आय), लोवर-मिडिल इनकम (निम्न-मध्यम आय), अपर-मिडिल इनकम (उच्च-मध्यम आय) और हाई इनकम (उच्च आय) शामिल हैं। साल 1990 में दुनियाभर में 218 देशों में से 51 देश निम्न आय वर्ग में थे, जबकि 2024 के ताजा वर्गीकरण के अनुसार यह संख्या घटकर 26 रह गई है। इसी तरह, हाई इनकम वाले देशों की संख्या 1990 में 39 थी जो 2024 में बढ़कर 87 हो गई है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को आजादी के बाद निम्न-मध्यम आय वर्ग से बाहर निकलने में 60 साल लगे। साल 1962 में भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय सिर्फ 90 डॉलर थी। यह 2007 तक बढ़कर 910 डॉलर हो गई। इसके बाद, भारत ने तेजी से तरक्की की। साल 2009 में प्रति व्यक्ति आय 1,000 डॉलर, 2019 में 2,000 डॉलर और 2026 तक 3,000 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह सब 'अपर-मिडिल इनकम' वाले देश बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारत अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक 4,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय हासिल करने की राह पर है। इससे वह उच्च-मध्यम आय वाला देश बन जाएगा। इस तरह वह चीन और इंडोनेशिया के मौजूदा समूह का हिस्सा हो जाएगा।' यह एक बड़ी उपलब्धि होगी जो भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी। हाई इनकम वाला देश बनने के ल‍िए क‍ितनी चाह‍िए रफ्तार? हाई इनकम वाला देश बनने के लिए भारत को 2047 तक अपनी प्रति व्यक्ति जीएनआई (ग्रॉस नेशनल इनकम) को 7.5 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ाना होगा। यह दर हासिल की जा सकती है। कारण है कि साल 2001-2024 के दौरान यह दर 8.3 फीसदी रही है। हालांकि, अगर हाई इनकम वाला देश बनने की सीमा 13,936 डॉलर से बढ़कर 2047 तक 18,000 डॉलर प्रति व्यक्ति हो जाती है तो भारत को उस समय तक प्रति व्यक्ति आय में सालाना 8.9 फीसदी की दर से बढ़ोतरी करनी होगी। आर्थिक मोर्चे पर भी भारत की स्थिति मजबूत होने का अनुमान है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत साल 2028 तक पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके बाद 2035 तक यह 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है। वर्तमान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी है। इसके बाद चीन का नंबर आता है। लेकिन, भारत 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा जो वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित करेगा। साल 1990 में भारत दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। लेकिन, 2025 तक यह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लेगा। यह दर्शाता है कि भारत ने पिछले कुछ दशकों में कितनी तेजी से आर्थिक तरक्‍की की है। भारत को क‍िस चीज पर देना होगा जोर? एसबीआई रिसर्च ने इस तरक्‍की को बनाए रखने के लिए सुधारों पर जोर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारत को अपने सुधारों के कार्यक्रम को जारी रखना चाहिए ताकि वह अतिरिक्त और तेजी से होने वाली आर्थिक ग्रोथ हासिल कर सके, जो इसे उच्च-आय वाले देश की श्रेणी तक पहुंचाने के लिए जरूरी है।' रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी और मौजूदा कीमतों पर जीडीपी में औसतन 11-11.5 फीसदी की दर से बढ़ोतरी संभव है। यह ग्रोथ देश को 2030 तक उच्च-मध्यम आय और 2047 तक उच्च आय वाले देश की श्रेणी में लाने में मददगार होगी। यह अनुमान भारत की मजबूत आर्थिक नीतियों और विकास की क्षमता को दर्शाता है। लेखक के बारे मेंअमित शुक्‍लाअमित शुक्‍ला, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह 18 साल से भी ज्‍यादा समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। इस दौरान उन्‍होंने बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार, शेयर मार्केट, राजनीति, देश-विदेश, प्रॉपर्टी, करियर जैसे तमाम विषयों को कवर किया है। पत्रकारिता और जनसंचार में PhD करने वाले अमित शुक्ला 7 साल से भी ज्‍यादा समय से टाइम्‍स इंटरनेट लिमिटेड के साथ जुड़े हैं। टाइम्‍स इंटरनेट में रहते हुए नवभारतटाइम्‍स डॉट कॉम से पहले इकनॉमिकटाइम्‍स डॉट कॉम में सेवाएं दीं। उन्‍होंने टीवी टुडे नेटवर्क, दैनिक जागरण, डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों के अलावा शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया है। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (नोएडा) शामिल हैं। लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई है। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई अन्य भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया।... और पढ़ें

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