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चीन-लंदन से उलट: भारत के रियल एस्टेट में बंपर मुनाफा!
AajTak
January 20, 2026•2 days ago

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चीन और लंदन जैसे देशों के रियल एस्टेट बाजारों में गिरावट के बावजूद, भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र मजबूत बना हुआ है। सरकारी सुधारों, पारदर्शिता और वास्तविक मांग के कारण यह विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन गया है। भारत में लग्जरी घरों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो बाजार के सकारात्मक रुझान को दर्शाता है।
चीन का रियल एस्टेट सेक्टर गहरे संकट में है और खरीदारों की कमी के चलते बिल्डर्स भारी डिस्काउंट देने को मजबूर हैं, वहीं लंदन जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्र में भी मकान मालिक घाटे में अपनी संपत्तियां बेच रहे हैं. लेकिन इन वैश्विक मंदी के संकेतों के बीच, भारतीय रियल एस्टेट बाजार एक 'हॉट स्पॉट' बनकर उभरा है. दुनिया भर के निवेशक आज भारत पर दांव लगा रहे हैं. आखिर क्या वजह है कि जब दुनिया के दिग्गज बाजार बेहाल हैं, तब भारत का रियल एस्टेट सेक्टर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है?
रूट्स डेवलपर्स के डायरेक्टर जितेंद्र यादव कहते हैं- 'हमारे देश के रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी के पीछे सरकारी सुधारों का बड़ा रोल है. RERA, GST और डिजिटल लेन-देन से इस सेक्टर में पारदर्शिता आई है. एक तरफ जहां चीन में सरकार की सख्ती और कर्ज में डूबे डेवलपर्स संकट में फंस गए, वहीं भारत में नए नियमों ने बाजार को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बना दिया है.'
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जितेंद्र यादव आगे कहते हैं- 'अब वो दौर बीत गया जब घर खरीदना एक जोखिम भरा काम था. आज प्रोजेक्ट की बारीकियों से लेकर डिलीवरी की तारीख तक, सब कुछ पारदर्शी तरीके से हो रहा है. भारतीय रियल एस्टेट विदेशी पूंजी के लिए आकर्षण बन गया है. एक तरफ लंदन जैसे बड़े बाजारों में अस्थिर टैक्स नीतियों ने अनिश्चितता पैदा की है, तो दूसरी तरफ भारत के स्थिर नियमों ने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया है कि यहां उनका पैसा न केवल सुरक्षित है, बल्कि लंबे समय में शानदार रिटर्न देने के लिए तैयार है."
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क्यों संकट में है चीन का रियल एस्टेट मार्केट?
चीन के रियल एस्टेट सेक्टर की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने करीब 70 प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में 0.4% की गिरावट दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट की जड़ में नौकरियों की अनिश्चितता और लोगों की घटती आय है. जब आमदनी का स्रोत ही सुरक्षित नहीं होगा, तो रियल एस्टेट जैसे बड़े निवेश से खरीदार दूरी बनाएंगे ही. हैरानी की बात तो यह है कि चीन के वो 4 सबसे बड़े आर्थिक केंद्र, जिन्हें 'मार्केट का पावरहाउस' माना जाता था और जहां मांग कभी कम नहीं होती थी, आज वे भी इस मंदी की चपेट में हैं. बीजिंग, गुआंगझू और शेनझेन जैसे महानगरों का प्रॉपर्टी बाजार भी इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, जो चीन की डगमगाती अर्थव्यवस्था का एक गंभीर संकेत है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
Dalcore के एमडी सिद्धार्थ चौधरी कहते हैं- 'लंदन और चीन में मचे हाहाकार ने यह साबित कर दिया है कि बिना ठोस मांग के सिर्फ कर्ज के दम पर खड़ा बाजार टिकाऊ नहीं हो सकता. भारत आज 'हॉट मार्केट' इसलिए है, क्योंकि यहां डिमांड की जड़ें पारिवारिक जरूरतों और बेहतर लाइफस्टाइल में हैं. यहां वास्तविक खरीदार (End-users) बाजार को चला रहे हैं. सरकार द्वारा लाए गए नीतिगत सुधारों ने खरीदारों के भरोसे को एक नई ऊंचाई दी है. भारत को अपनी इस बढ़त को बरकरार रखने के लिए संतुलित नियमों और टिकाऊ विकास के रास्ते पर ही आगे बढ़ना होगा. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा मार्केट सट्टेबाजी के जाल से दूर रहे और आम आदमी की पहुंच के भीतर बना रहे. "
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लंदन के प्रॉपर्टी बाजार का हाल
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित रियल एस्टेट बाजारों में से एक माने जाने वाले लंदन की चमक अब फीकी पड़ती दिख रही है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंदन के कई इलाकों में मकान मालिक अपनी संपत्तियां घाटे में बेचने को मजबूर हैं. अप्रैल 2025 से लागू हुए नए स्टाम्प ड्यूटी नियमों और ऊंची ब्याज दरों ने खरीदारों के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है, जिससे मांग में भारी गिरावट आई है. स्थिति यह है कि वेस्टमिंस्टर जैसे महंगे इलाकों में कीमतों में करीब 7.9% तक की कटौती देखी गई है. जहां पहले लंदन निवेश के लिए 'सेफ हेवन' माना जाता था, वहीं अब टैक्स में बदलाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक यहां से हाथ खींच रहे हैं, जिससे प्रॉपर्टीज महीनों तक बिना बिके बाजार में अटकी हुई हैं.
'द वीक' की एक रिपोर्ट बताती है कि लंदन का प्रॉपर्टी मार्केट इस वक्त जबरदस्त गिरावट के दौर से गुजर रहा है. पिछले साल इंग्लैंड और वेल्स के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में लंदन में सबसे अधिक घर घाटे में बेचे गए. सबसे बुरा हाल फ्लैट्स के मालिकों का है, जिन्होंने अपनी प्रॉपर्टी की कीमत में 34% तक की भारी गिरावट दर्ज की है. आलम यह है कि कई मालिकों की संपत्ति की वैल्यू से लाखों पाउंड्स साफ हो गए हैं, जिससे वे औने-पौने दाम पर घर बेचने को मजबूर हैं.
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एम3एम इंडिया के प्रेसिडेंट मंगला का कहना है- "लंदन और चीन के प्रॉपर्टी बाजारों में मची उथल-पुथल यह साफ करती है कि केवल कर्ज और सट्टेबाजी के दम पर खड़ा बाजार लंबे समय तक टिक नहीं सकता. इसके विपरीत, भारत का रियल एस्टेट मार्केट आज इसलिए मजबूत है क्योंकि यह लोगों की वास्तविक जरूरतों और सपनों पर टिका है. आज का खरीदार केवल घर नहीं, बल्कि वर्ल्ड-क्लास क्वालिटी और भरोसे को तलाश रहा है. प्रीमियम और ब्रांडेड घरों की बढ़ती मांग इसी बदलाव का नतीजा है. M3M में हमें Jacob & Co. और Elie Saab जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के साथ जो रिस्पॉन्स मिल रहा है, वह साबित करता है कि भारतीय अब वैश्विक जीवनशैली को अपना रहे हैं और यह निवेश भविष्य के लिए बेहद सुरक्षित है."
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भारत का चल रहा है गोल्डन टाइम
दुनिया भर में मंदी के संकेतों के बीच भारतीय रियल एस्टेट बाजार एक 'गोल्डन एरा' से गुजर रहा है. CBRE और नाइट फ्रैंक (Knight Frank) की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में भारतीय रियल एस्टेट में रिकॉर्ड 14.3 बिलियन डॉलर का निवेश आया है, जो पिछले साल की तुलना में 25% अधिक है. जहां चीन और लंदन जैसे बाजार खरीदारों की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं भारत में लग्जरी घरों (₹4 करोड़ से ऊपर) की बिक्री में 85% का जबरदस्त उछाल देखा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि RERA द्वारा लाई गई पारदर्शिता, स्थिर सरकारी नीतियों और भारतीयों की बढ़ती आमदनी ने घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा इतना बढ़ा दिया है कि भारत अब दुनिया के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित और आकर्षक ठिकाना बन गया है.
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व्हाइटलैंड कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर स्ट्रेटजी, सुदीप भट्ट कहते हैं- “चीन और लंदन के धराशायी होते प्रॉपर्टी बाजार भारत के लिए एक बड़ा सबक हैं कि जब अर्थव्यवस्था, नीतियां और निवेशकों का भरोसा डगमगाता है, तो रियल एस्टेट की नींव सबसे पहले हिलती है. चीन में अधूरे प्रोजेक्ट्स और बिल्डर्स की माली हालत ने ग्राहकों का भरोसा तोड़ा, वहीं लंदन में कर नीतियों की अस्थिरता ने निवेशकों को पलायन पर मजबूर कर दिया. इसके उलट, भारत की सफलता का राज इसकी स्थिर नीतियां और कड़े कानून हैं. RERA जैसे सुधारों ने न केवल बाजार में अनुशासन लाया, बल्कि खरीदारों को वह सुरक्षा दी जो चीन और लंदन में नदारद दिखी. ."
सुदीप भट्ट आगे कहते हैं- ' भारत में अब 'ब्रांडेड रेजिडेंसी' का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिसने घर खरीदने के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है. अब घर खरीदना सिर्फ सिर पर छत पाने जैसा नहीं है, बल्कि यह बेहतर लाइफस्टाइल, सुरक्षा और भविष्य के मुनाफे से जुड़ा एक बड़ा फैसला बन चुका है. यही वजह है कि जब दुनिया के बड़े देशों में उथल-पुथल मची है, तब भी भारत का प्रॉपर्टी बाजार मजबूती से आगे बढ़ रहा है. '
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भारत के लिए क्या सबक?
जीएचडी ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर,भारत ठकरान कहते हैं-' चीन में 'कर्ज का जाल' और लंदन में 'विदेशी निवेश की अति' ने वहां के रियल एस्टेट को संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. यह भारत के लिए एक बड़ी नसीहत है कि बाजार की चमक को बरकरार रखने के लिए 'धरातल की सच्चाई' का होना जरूरी है. चीन ने बिना खरीदार के घर तो खड़े कर दिए, लेकिन वह बाजार की बुनियाद को मजबूत नहीं कर सका. '
भारत का कहना है कि हमारे देश की कहानी इससे अलग है, क्योंकि यहां की तरक्की का आधार लोगों की वास्तविक जरूरत और नीतिगत स्थिरता है. 'आने वाले समय में भी भारत को अपनी सफलता का यह 'हॉट टैग' बनाए रखने के लिए नियमों की पारदर्शिता, सीमित कर्ज और ग्राहकों के भरोसे को प्राथमिकता देनी होगी. स्वस्थ रियल एस्टेट वही है जो निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदार के हितों की भी रक्षा करे.'
भारत के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि बाजार की असली ताकत वास्तविक मांग, अनुशासित वित्तीय प्रबंधन और दीर्घकालिक विश्वास में निहित है. सांघवी रियल्टी के प्रबंध निदेशक, शंकरेश सांघवी कहते हैं- 'जो बाजार ठोस बुनियादी कारकों (Fundamentals) पर टिके होते हैं, वे वैश्विक अस्थिरता और उतार-चढ़ाव के बीच भी मजबूती से खड़े रहते हैं. भारत का रियल एस्टेट सेक्टर आज इसी मजबूती का प्रमाण दे रहा है,'
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