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भारत में इन 7 जानलेवा बीमारियों से होती हैं सबसे ज्यादा मौतें, जानें कारण
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January 20, 2026•2 days ago

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भारत में दिल की बीमारियां, सांस संबंधी रोग, टीबी, डायबिटीज, कैंसर, डायरिया और नवजात शिशु की समस्याएं मौतों के प्रमुख कारण हैं। खराब जीवनशैली, प्रदूषण, इलाज में देरी और जागरूकता की कमी इन बीमारियों को घातक बनाती है। नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर इलाज से इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
भारत में बीमारियों से होने वाली मौतों के पीछे खराब जीवनशैली, प्रदूषण, इलाज में देरी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसे कारण हैं। लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। जागरूकता ही इन जानलेवा बीमारियों से बचा सकती है।
भारत में हर साल लाखों लोगों की जान ऐसी बीमारियों के कारण चली जाती है, जिन्हें समय पर पहचान और सही इलाज से रोका या कंट्रोल किया जा सकता है। हर साल लाखों लोग दिल की बीमारी, सांस से जुड़ी रोग, संक्रमण, डायबिटीज, कैंसर और नवजात शिशुओं की समस्याओं के कारण जान गंवाते हैं। हकीकत यह है कि इनमें से अधिकतर बीमारियों को समय रहते पहचानकर रोका या कंट्रोल किया जा सकता है। किसी भी बीमारी से मौत अचानक नहीं होती है। लोगों में जागरूकता की कमी, खराब जीवनशैली, इलाज में देरी और खराब स्वास्थ्य सेवाएं इनका बड़ा कारण बनते हैं। अगर लोग बीमारियों के शुरुआती लक्षण समझ जाएं, उन्हें गंभीरता से लें, रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराएं, साफ-सुथरे वातावरण में रहें और सही समय पर इलाज लें, तो मौतों की संख्या कम किया जा सकता है। यह जानना जरूरी है कि कौन-कौन सी बीमारियां सबसे ज्यादा जान लेती हैं ताकि लोग समय रहते लक्षण पहचान सकें और सही कदम उठा सकें।हार्ट डिजीज या कार्डियोवैस्कुलर डिजीज WHO के अनुसार, दिल की बीमारियां और स्ट्रोक भारत में मौतों का सबसे बड़ा कारण हैं। यहां 1 लाख लोगों में से 110 लोगों की जान इन बीमारी से चली जाती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, खराब डाइट, स्ट्रेस और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके मुख्य कारण हैं। कई लोग सालों तक लक्षण होने के बावजूद डॉक्टर के पास देर से जाते हैं। समय पर जांच, लाइफस्टाइल में बदलाव और सही इलाज से इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।पुरानी सांस की बीमारियां यहां 1 लाख लोगों में से 70 लोगों की जान सांस की बीमारियों से जाती है। हवा में प्रदूषण, चूल्हे का धुआं, तंबाकू सेवन और धूल-मिट्टी के संपर्क से फेफड़े धीरे-धीरे खराब होते जाते हैं। COPD जैसी बीमारियां अक्सर तब सामने आती हैं जब सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। समय पर जांच, स्मोकिंग छोड़ना और सही इलाज से मरीज की जिंदगी बेहतर हो सकती है।टीबी भारत में 1 लाख लोगों में से 25 लोगों की जान इस बीमारी से जाती है। इलाज योग्य होने के बावजूद टीबी आज भी भारत में जानलेवा बीमारी बनी हुई है। देर से पहचान, दवा बीच में छोड़ देना और कुपोषण इसके खतरे बढ़ाते हैं। कई मरीज लक्षण ठीक होते ही दवा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी दोबारा हो जाती है। पूरा इलाज और जागरूकता बेहद जरूरी है।डायबिटीज और उससे जुड़े रिस्क डायबिटीज सीधे जानलेवा नहीं है लेकिन इससे जुड़ी जटिलताएं बेहद खतरनाक होती हैं। अनकंट्रोल शुगर दिल, किडनी, आंखों और नसों को नुकसान पहुंचाती है। किडनी फेलियर, हार्ट अटैक और संक्रमण से कई मौतें होती हैं। देश में 1 लाख लोगों में से 23 लोगों की जान इससे जाती है। रेगुलर चेक-अप और लाइफस्टाइल में बदलाव से खतरा कम किया जा सकता है। कैंसर भारत में कैंसर से होने वाली मौतें तेजी से बढ़ रही हैं। कैंसर के लक्षण देरी से समझ आते हैं। लंग्स, ब्रेस्ट, सर्वाइकल, ओरल और कोलन कैंसर ज्यादा घातक हैं। तंबाकू, प्रदूषण और जांच में देरी इसके बड़े कारण हैं। समय पर जांच और इलाज से बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।डायरिया से जुड़ी बीमारियां डायरिया आज भी बच्चों और बुजुर्गों की जान ले रहा है। गंदा पानी, खराब सफाई और कुपोषण इसकी वजह हैं। यहां 1 लाख लोगों में से 34 की जान इससे जाती है। समय पर ORS और साफ पानी मिलने से ज्यादातर मौतें रोकी जा सकती हैं, फिर भी इलाज और जागरूकता की कमी से समस्या बनी हुई है।नवजात शिशुओं से जुड़ी समस्याएं समय से पहले जन्म, संक्रमण और डिलीवरी के दौरान जटिलताएं नवजात मौतों का बड़ा कारण हैं। गर्भावस्था में सही देखभाल, सुरक्षित प्रसव और जन्म के बाद निगरानी से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है।डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।.
भारत में हर साल लाखों लोगों की जान ऐसी बीमारियों के कारण चली जाती है, जिन्हें समय पर पहचान और सही इलाज से रोका या कंट्रोल किया जा सकता है। हर साल लाखों लोग दिल की बीमारी, सांस से जुड़ी रोग, संक्रमण, डायबिटीज, कैंसर और नवजात शिशुओं की समस्याओं के कारण जान गंवाते हैं। हकीकत यह है कि इनमें से अधिकतर बीमारियों को समय रहते पहचानकर रोका या कंट्रोल किया जा सकता है। किसी भी बीमारी से मौत अचानक नहीं होती है। लोगों में जागरूकता की कमी, खराब जीवनशैली, इलाज में देरी और खराब स्वास्थ्य सेवाएं इनका बड़ा कारण बनते हैं। अगर लोग बीमारियों के शुरुआती लक्षण समझ जाएं, उन्हें गंभीरता से लें, रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराएं, साफ-सुथरे वातावरण में रहें और सही समय पर इलाज लें, तो मौतों की संख्या कम किया जा सकता है। यह जानना जरूरी है कि कौन-कौन सी बीमारियां सबसे ज्यादा जान लेती हैं ताकि लोग समय रहते लक्षण पहचान सकें और सही कदम उठा सकें।हार्ट डिजीज या कार्डियोवैस्कुलर डिजीज WHO के अनुसार, दिल की बीमारियां और स्ट्रोक भारत में मौतों का सबसे बड़ा कारण हैं। यहां 1 लाख लोगों में से 110 लोगों की जान इन बीमारी से चली जाती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, खराब डाइट, स्ट्रेस और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके मुख्य कारण हैं। कई लोग सालों तक लक्षण होने के बावजूद डॉक्टर के पास देर से जाते हैं। समय पर जांच, लाइफस्टाइल में बदलाव और सही इलाज से इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।पुरानी सांस की बीमारियां यहां 1 लाख लोगों में से 70 लोगों की जान सांस की बीमारियों से जाती है। हवा में प्रदूषण, चूल्हे का धुआं, तंबाकू सेवन और धूल-मिट्टी के संपर्क से फेफड़े धीरे-धीरे खराब होते जाते हैं। COPD जैसी बीमारियां अक्सर तब सामने आती हैं जब सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। समय पर जांच, स्मोकिंग छोड़ना और सही इलाज से मरीज की जिंदगी बेहतर हो सकती है।टीबी भारत में 1 लाख लोगों में से 25 लोगों की जान इस बीमारी से जाती है। इलाज योग्य होने के बावजूद टीबी आज भी भारत में जानलेवा बीमारी बनी हुई है। देर से पहचान, दवा बीच में छोड़ देना और कुपोषण इसके खतरे बढ़ाते हैं। कई मरीज लक्षण ठीक होते ही दवा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी दोबारा हो जाती है। पूरा इलाज और जागरूकता बेहद जरूरी है।डायबिटीज और उससे जुड़े रिस्क डायबिटीज सीधे जानलेवा नहीं है लेकिन इससे जुड़ी जटिलताएं बेहद खतरनाक होती हैं। अनकंट्रोल शुगर दिल, किडनी, आंखों और नसों को नुकसान पहुंचाती है। किडनी फेलियर, हार्ट अटैक और संक्रमण से कई मौतें होती हैं। देश में 1 लाख लोगों में से 23 लोगों की जान इससे जाती है। रेगुलर चेक-अप और लाइफस्टाइल में बदलाव से खतरा कम किया जा सकता है।कैंसर भारत में कैंसर से होने वाली मौतें तेजी से बढ़ रही हैं। कैंसर के लक्षण देरी से समझ आते हैं। लंग्स, ब्रेस्ट, सर्वाइकल, ओरल और कोलन कैंसर ज्यादा घातक हैं। तंबाकू, प्रदूषण और जांच में देरी इसके बड़े कारण हैं। समय पर जांच और इलाज से बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।डायरिया से जुड़ी बीमारियां डायरिया आज भी बच्चों और बुजुर्गों की जान ले रहा है। गंदा पानी, खराब सफाई और कुपोषण इसकी वजह हैं। यहां 1 लाख लोगों में से 34 की जान इससे जाती है। समय पर ORS और साफ पानी मिलने से ज्यादातर मौतें रोकी जा सकती हैं, फिर भी इलाज और जागरूकता की कमी से समस्या बनी हुई है।नवजात शिशुओं से जुड़ी समस्याएं समय से पहले जन्म, संक्रमण और डिलीवरी के दौरान जटिलताएं नवजात मौतों का बड़ा कारण हैं। गर्भावस्था में सही देखभाल, सुरक्षित प्रसव और जन्म के बाद निगरानी से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है।डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।
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