Geopolitics
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भारत ने बांग्लादेश से राजनयिकों के परिवार वापस बुलाए, जानें बांग्लादेश ने क्या कहा
BBC
January 20, 2026•2 days ago

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भारत ने बांग्लादेश को 'नॉन फैमिली' राजनयिक तैनाती स्थल घोषित किया है, जिसके तहत अब वहाँ तैनात भारतीय अधिकारी अपने परिवार को साथ नहीं ले जा सकेंगे। यह निर्णय 1 जनवरी से लागू हो गया है। सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश में आगामी चुनावों के मद्देनजर सुरक्षा चिंताओं के चलते यह कदम उठाया गया है। बांग्लादेश ने भारत के इस फैसले पर आश्चर्य व्यक्त किया है।
Author, शुभज्योति घोष
पदनाम, बीबीसी बांग्ला
एक घंटा पहले
बीबीसी को पता चला है कि भारत ने बांग्लादेश को 'नॉन फैमिली' यानी परिवार के साथ न भेजे जाने वाले राजनयिक तैनाती स्थल के रूप में दर्ज करने का फ़ैसला किया है.
इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश में तैनात किए जाने वाले भारतीय राजनयिक और अधिकारी अब अपने पति या पत्नी और बच्चों को अपने साथ नहीं ले जा सकेंगे.
अब तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने 'नॉन फैमिली' की यह श्रेणी सिर्फ़ कुछ ही देशों पर लागू की थी, जिनमें इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान शामिल हैं. इस ताज़ा फ़ैसले के बाद अब बांग्लादेश को भी इस सूची में शामिल कर लिया गया है.
बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक़ यह फ़ैसला 1 जनवरी से लागू हो गया है. बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों को सूचित किया गया कि उनके पति या पत्नी और बच्चों को 8 जनवरी तक भारत लौटना होगा. जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, उन्हें इसके लिए अतिरिक्त सात दिन का समय दिया गया था.
नतीजतन, पिछले गुरुवार (15 जनवरी) तक ढाका, चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही में स्थित भारतीय मिशनों में तैनात अधिकारियों के परिवारों को बेहद कम समय के नोटिस पर भारत लौटना पड़ा.
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भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस फ़ैसले को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है. हालांकि साउथ ब्लॉक के कई सूत्रों ने बीबीसी से बातचीत में इस फ़ैसले की पुष्टि की है.
'ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर लिया होगा फ़ैसला'
बांग्लादेश में भारत के पूर्व उच्चायुक्त पिनाक रंजन चक्रवर्ती का मानना है कि यह क़दम बांग्लादेश में फ़रवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले सुरक्षा की स्थिति और ख़राब होने की आशंकाओं के कारण उठाया गया है क्योंकि इससे उच्चायोग कर्मचारियों के परिवारों को ख़तरा हो सकता है.
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बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि चुनाव से पहले ऐसा फ़ैसला लिया जाना कोई असामान्य बात है. भारत के पास ज़रूर कुछ ख़ुफ़िया जानकारी रही होगी, जिससे यह संकेत मिलता हो कि भारतीय नागरिकों या राजनयिक कर्मचारियों के परिवारों को निशाना बनाकर हिंसा की जा सकती है. इसी वजह से बांग्लादेश को नॉन फैमिली तैनाती स्थल घोषित किया गया है."
उन्होंने आगे कहा, "इसके अलावा, अवामी लीग जैसी बड़ी राजनीतिक पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है और इस फ़ैसले को लेकर काफ़ी विवाद भी है. ऐसे में चुनाव से पहले या उसके बाद हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता."
हालांकि चक्रवर्ती को लगता है कि यह फ़ैसला अस्थायी होगा. उनके मुताबिक़ चुनावों के बाद जब कोई राजनीतिक सरकार सत्ता में आएगी और हालात स्थिर होंगे, तो इस नीति की समीक्षा की जा सकती है और अधिकारियों को फिर से परिवार के साथ बांग्लादेश में रहने की अनुमति मिल सकती है.
गौर करने वाली बात यह भी है कि दिल्ली और ढाका के बीच एक-दूसरे के राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर तनाव पिछले कुछ समय से सुलग रहा है. यह मुद्दा दोनों देशों की ओर से एक- दूसरे के उच्चायुक्तों को तलब किए जाने तक पहुंच चुका है.
20 दिसंबर की देर रात, बांग्लादेश में हिंदुओं के कथित उत्पीड़न के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों का एक समूह कथित तौर पर दिल्ली में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज़ हामिदुल्लाह के आवास के बहुत क़रीब तक पहुंच गया था. इन प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ नारे लगाए थे और कथित तौर पर उच्चायुक्त की जान को लेकर धमकियां भी दी थीं.
इसके बाद बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों का उच्चायुक्त के आवास के 'इतना क़रीब' पहुंच पाना सिर्फ़ इसलिए मुमकिन हो सका, क्योंकि उन्हें चाणक्यपुरी जैसे अत्यधिक सुरक्षित राजनयिक क्षेत्र में ऐसा करने दिया गया. उनके इस बयान को उस प्रदर्शन को भारत के संभावित समर्थन की ओर इशारा माना गया.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस आरोप को सख़्ती के साथ खारिज कर दिया था. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान जारी कर बांग्लादेशी उच्चायुक्त की सुरक्षा में सेंध लगाए जाने के दावों को बेबुनियाद बताया था.
'ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया दी'
इस घटना के एक हफ़्ते के भीतर ही भारत ने बांग्लादेश को 'नॉन फैमिली' राजनयिक तैनाती स्थल की कैटेगरी में डालने का फ़ैसला कर लिया.
ढाका में कम से कम दो कार्यकाल पूरे कर चुकीं एक अन्य पूर्व वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने कहा कि इस क़दम से उन्हें कोई हैरानी नहीं है. उनके मुताबिक़ बांग्लादेश कई सालों से अमेरिकी राजनयिकों के लिए भी नॉन फैमिली पोस्टिंग बना हुआ है.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "2016 में ढाका के होली आर्टिसन बेकरी पर हुए आतंकवादी हमले के बाद से बांग्लादेश में तैनात अमेरिकी राजनयिकों को अपने पति या पत्नी और बच्चों को साथ लाने की अनुमति नहीं दी जाती. मुझे पता है कि उनमें से कई लोगों ने इस फ़ैसले को बदलवाने के लिए काफ़ी प्रयास किए, लेकिन इसे कभी वापस नहीं लिया गया."
उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका पिछले लगभग एक दशक से इस नियम को लागू रखे हुए है. उस लिहाज़ से देखें, तो हमने इसे अब जाकर लागू किया है."
बीबीसी संवाददाता इशाद्रिता से बात करते हुए तौहीद हुसैन ने भारत के इस फ़ैसले पर कहा, "इस बात का कोई सबूत नहीं है कि हम भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं, केकेआर ने मुस्ताफ़िज़ुर को ख़रीदा था, जो राजनेता नहीं हैं, और भारत ने यह स्वीकार किया कि वे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते. ऐसी बातें न ही होतीं तो अच्छा था."
उन्होंने कहा, "भारत बांग्लादेश को पाकिस्तान वाली श्रेणी में रखता है या नहीं, यह उसका फ़ैसला है, ज़ाहिर है, यह खेदजनक है, लेकिन मैं उनके फ़ैसले को बदल नहीं सकता. अगर उन्हें लगता है कि वे यहां सुरक्षित नहीं हैं, तो उन्हें ऐसा करने दीजिए, ऐसा कोई मामला नहीं है, जिसमें उन्हें सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ा हो,"
उन्होंने यह भी कहा, "अगर मैं पिछले 40 वर्षों में अलग‑अलग भूमिकाओं में भारत के साथ अपने अनुभव को देखूं, तो मैं कहूंगा कि भारत ने इस मामले में कुछ हद तक ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया दी है. मुझे भारत से ज़्यादा संतुलित प्रतिक्रिया की उम्मीद थी."
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