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बांग्लादेश में सुरक्षा चिंता: भारतीय मिशन अधिकारियों के परिवार भारत लौटे
Navbharat Times
January 20, 2026•2 days ago
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भारत ने बांग्लादेश में अपने मिशन अधिकारियों के परिवारवालों को वापस बुलाया है। यह फैसला वहां की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए लिया गया है, खासकर आगामी चुनावों के मद्देनज़र। हाल में दोनों देशों के बीच राजनयिक असहजता देखी गई है, जिससे भारतीय मिशनों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है।
नई दिल्ली : भारत सरकार ने बांग्लादेश में अपने हाईकमीशन और दूसरे मिशनों के अधिकारियों के परिवारवालों को भारत आने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक ये फैसला वहां सुरक्षा की मौजूदा व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है । हालांकि इस दौरान भारतीय मिशन और दूसरे पोस्ट अपना रोजमर्रा का कामकाज जारी रखेंगे और पूरी तरह फंक्शनल हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। इसी दिन जनमत संग्रह भी होना तय है।
जरूरत पर होगी सुरक्षा स्थिति की समीक्षा
अगस्त 2024 में पूर्व पीएम शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद वहां मोहम्मद युनुस प्रशासन के तहत चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों में हसीना के दल अवामी लीग को प्रतिबंधित किया गया है। सूत्रों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर भारत सरकार सुरक्षा स्थिति की समीक्षा भी कर सकती है। बता दें हाल के वक्त में भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक असहजता भी देखने को मिली है। बीते दिनों छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग के सामने विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले । बांग्लादेश में भारतीय मिशन और राजनयिकों की सुरक्षा भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इस मसले पर भारत ने दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब भी किया था।
भारतीय मिशनों की सुरक्षा पर चिंता
सरकार ने हमीदुल्ला को बुलाकर ढाका में भारतीय मिशनों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी। वहीं, बांग्लादेश ने भी भारतीय दूत प्रणय वर्मा के समक्ष दिल्ली स्थित अपने उच्चायोग के बाहर हुए प्रदर्शन पर चिंता जताई थी। इसी दौरान दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेशी हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन किया था
लेखक के बारे मेंअल्पयू सिंह अल्पयू सिंह, नवभारत टाइम्स के नेशनल ब्यूरो में असिस्टेंट एडिटर हैं। वो 20 वर्षों से भी ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सामाजिक मुद्दों पर ग्राउंड रिपोर्ट्स, राजनीति, अल्पसंख्यक, महिलाएं और पर्यावरण संबंधी मुद्दों से जुड़ी अपडेट्स और विश्लेषण पर लिखती रही हैं। अल्पयू पिछले 2 सालों से नवभारत टाइम्स के साथ हैं। इससे पहले उन्होंने ईटीवी करेंट अफेयर्स डेस्क, राष्ट्रीय सहारा, ज़ी न्यूज़ आज स्वराज एक्सप्रेस न्यूज चैनल में न्यूज बुलेटिन और प्राइमटाइम शोज़ की जिम्मेदारी संभाली हैं। एडीटर जी और गांव कनेक्शन की दूरदर्शन पर लॉंचिग टीम का भी हिस्सा रही हैं। राजनीति से जुड़े मेन बुलेटिन और कॉपी के अलावा विनोद दुआ शो और पुण्य प्रसून वाजपेयी के बड़ी खबर न्यूज बुलेटिन के रिसर्च, कॉपी और प्रोडक्शन की जिम्मेदारी संभाली है। वहीं फर्स्ट पोस्ट, द वायर, आईचौक जैसे वेबसाइट्स के कॉलम्स लिखती रही हैं। हरियाणा में मॉब लिंचिंग, गौरक्षों और प्रशासन के जटिल ताने बाने को लेकर डॉक्यूमेंट्री, एआरसी -सीएए के विरोध और अल्पसंख्यकों को लेकर उसके प्रभाव की वीडियो कवरेज, जोशीमठ के दरकने के वक्त लंबी सीरीज की रिपोर्टिंग समेत कई दूसरे विषयों पर डॉक्यूमेंट्री और फीचर्स लिखे और प्रोड्यूस किए हैं। इसके साथ साथ ही साहित्य और सिनेमा भी लिखती रही हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से पॉलिटकल साईंस में एम ए (यूनिवर्सिटी में सिल्वर मेडल) जामिया मिलिया के एमसीआरएसी से टेलीविजन पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और FTTI से फिल्म एप्रिसिएशन का सर्टिफिकेट कोर्स किया है। जब काम नहीं कर रही होती तो पहाड़ों में पाई जाती हैं।... और पढ़ें
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