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बांग्लादेश की चाल: चीनी राजदूत को तीस्ता नदी के पास ले गई यूनुस सरकार

Hindustan
January 20, 20262 days ago
बांग्लादेश की ऐसी हिमाकत, चीनी राजदूत को ‘चिकन नेक’ के पास लेकर गई यूनुस सरकार

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बांग्लादेश ने चीनी राजदूत को 'चिकन नेक' के पास तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र का दौरा कराया, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ीं। यह क्षेत्र भारत के पूर्वोत्तर को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब है। चीन इस परियोजना को जल्द लागू करने में इच्छुक है, जबकि भारत और पश्चिम बंगाल की अपनी चिंताएं हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने चीन के राजदूत याओ वेन को तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र में जाने की अनुमति दी, जो भारत के रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब स्थित है। इसे 'चिकन नेक' के नाम से भी जाना जाता है। यह 22 किलोमीटर चौड़ा संकरा भू-भाग भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें चीनी राजदूत याओ वेन ने सोमवार को रंगपुर जिले के कौनिया उपजिला में तीस्ता नदी के कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान बांग्लादेश की पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन उनके साथ थीं। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि चीनी राजदूत का यह दौरा तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TMP) के तहत चल रहे तकनीकी मूल्यांकन से जुड़ा हुआ है। यूनुस पिछले साल चीन में दिए गए अपने उस बयान को लेकर विवादों में रहे थे, जिसमें उन्होंने चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार और भारत के लैंडलॉक्ड पूर्वोत्तर की बात कही थी- इन टिप्पणियों की गूंज दिसंबर में ढाका सहित कई बांग्लादेशी शहरों में हुए भारत-विरोधी प्रदर्शनों तक सुनाई दी थी, जहां भारतीय राजनयिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। चीन जल्द कार्यान्वयन का इच्छुक बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन ने कहा कि चीन तीस्ता मास्टर प्लान (TMP) को जल्द से जल्द लागू करने का इच्छुक है। उनके अनुसार- बांग्लादेश और चीन दोनों ही TMP को अमल में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना की जांच-परख (स्क्रूटनी) की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल काम शुरू करना संभव नहीं है। भारत और पश्चिम बंगाल की चिंताएं बांग्लादेश के उत्तरी जिलों में कृषि और आजीविका के लिए तीस्ता नदी जीवनरेखा मानी जाती है। लेकिन भारत के लिए- खासतौर पर पश्चिम बंगाल के लिए भी यह नदी उतनी ही अहम है। इसी कारण तीस्ता जल-बंटवारे को लेकर दशकों से बातचीत चल रही है, मगर पश्चिम बंगाल सरकार की चिंताओं के चलते अंतिम समझौता अब तक नहीं हो सका है। ढाका-बीजिंग बातचीत रविवार को चीनी राजदूत याओ वेन और बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान के बीच हुई बैठक के बाद यूनुस की प्रेस विंग ने सोशल मीडिया मंच X पर बताया- दोनों पक्षों ने साझा हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और बांग्लादेश–चीन की दीर्घकालिक मित्रता व विकास सहयोग की पुष्टि की। पोस्ट के मुताबिक, बातचीत में तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट और प्रस्तावित बांग्लादेश–चीन फ्रेंडशिप हॉस्पिटल जैसे मुद्दे भी शामिल थे। इसमें यह भी कहा गया कि चीनी राजदूत ने परियोजना क्षेत्र का दौरा करने की जानकारी दी और तकनीकी मूल्यांकन को तेजी से पूरा करने की चीन की प्रतिबद्धता दोहराई। बांग्लादेश सरकार ने बताया कि चीनी राजदूत ने देश के लोकतांत्रिक बदलाव के लिए अपने देश का समर्थन जताया और आगामी राष्ट्रीय चुनावों के सफल आयोजन की शुभकामनाएं भी दीं। गौरतलब है कि 2024 में मुख्य सलाहकार नियुक्त किए गए मुहम्मद यूनुस ने 2025 में चीन में दिए एक इंटरव्यू में बीजिंग से बांग्लादेश में मजबूत आर्थिक ढांचे के निर्माण का आह्वान किया था। उन्होंने बांग्लादेश को क्षेत्र में समुद्र का एकमात्र संरक्षक बताते हुए उसके रणनीतिक महत्व का जिक्र किया था। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक गला है, क्योंकि कोई भी व्यवधान पूर्वोत्तर के लगभग 5 करोड़ लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन से घिरा हुआ है। हाल के महीनों में बांग्लादेश द्वारा लालमोनिरहाट पुराने एयरबेस को सक्रिय करने और चीन की संभावित भागीदारी की खबरें भी भारत के लिए चिंता का विषय रही हैं।

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    बांग्लादेश में चीनी राजदूत: तीस्ता पर भारत-चीन तनाव