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क्या बच्चों को सारे टीके लगाना खतरनाक है? ट्रंप के फैसले पर डॉक्टरों का गुस्सा
News18 Hindi
January 19, 2026•3 days ago

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अनिवार्य टीकों की संख्या घटाई, जिससे वैश्विक स्तर पर डॉक्टरों में आक्रोश है। भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों में टीकाकरण ही बीमारियों को रोकने का एकमात्र तरीका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के फैसले का भारत पर कोई सीधा असर नहीं होगा, लेकिन गरीब वर्ग टीकाकरण से वंचित हो सकता है।
Written by :
Lakshmi Narayan
Last Updated:January 19, 2026, 15:36 IST
Childhood Vaccine: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश में बच्चों को दी जाने वाली अनिवार्य वैक्सीन की संख्या 17 से घटाकर 10 कर दी. इससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत जैसे देशों में भी वैक्सीन को सीमित कर देनी चाहिए. हालांकि ट्रंप के इस फैसले पर दुनिया भर के डॉक्टरों ने तीखी आलोचना की है. आइए जानते हैं कि भारत में इसका क्या असर होगा.
Childhood Vaccine: बचपन में जैसे ही टीका का नाम सुनते थे, दिमाग सुन हो जाता था. फिर इससे बचने के लिए तरह-तरह की शैतानियां किया करते थे. टीका से जुड़ी ये यादें भारत में हर किसी के मन में जरूर होती है. पर ट्रंप के एक फैसले ने टीकाकरण को लेकर कई सवाल पैदा कर दिए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश में टीका की संख्या को कम कर दिया है. पहले अमेरिका में बच्चों को अनिवार्य रूप से 17 तरह के टीका लगाए जाते थे लेकिन अब ट्रंप ने इसे 10 तक सीमित कर दिया है. यानी इसके बाद माता-पिता तय करेंगे कि वे अपने बच्चों को टीका लगाएंगे या नहीं. ट्रंप के इस फैसले पर दुनिया भर के डॉक्टरों ने तीखी आलोचना की है.
किन-किन बीमारियों की वैक्सीन हटाई गई
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज एंड प्रिवेंशन सेंटर ने इन्फ्लुएंजा, कोविड-19, रोटावायरस, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस, मेनिनजाइटिस वैक्सीन को यूनिवर्सल लिस्ट से हटाकार शेयर्ड क्लीनिकल डिसीजन-मेकिंग की श्रेणी में डाल दिया है. इसका मतलब है कि अब इन टीकों को लगवाना है या नहीं इसका फैसला डॉक्टर और माता-पिता को आपसी चर्चा के आधार पर व्यक्तिगत रूप से लेना होगा.
भारत में क्या है स्थिति
भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया जाता है जहां 11 तरह की बीमारियों के लिए बच्चों को मुफ्त में अनिवार्य टीका लगाया जाता है. इनमें टीबी से बचाव के लिए बीसीजी, पोलियो, हेपटाइटिस बी जन्म के समय ही दे दिया जाता है. इसके बाद 14 हफ्ते के अंदर मिशन इंद्रधनुष के तहत डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी और हिब से बचने के लिए पैंटावैलेंट टीका, पोलियो टीका, रोटावायरस वाला टीका और न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन लगाई जाती है. 9 से 12 महीने में मीजल्स-रूबेला, जापानी इंसेफेलाइटिस, न्यूमोकोकल वैक्सीन, विटामिन ए टीका लगाया जाता है. इसके बाद कई तरह की बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगाए जाते हैं.
डॉक्टरों का आक्रोश क्यों
दुनिया भर के वैज्ञानिकों का तर्क है कि ये टीके उन बीमारियों को रोकते हैं जिनसे पहले लाखों बच्चे मर जाते थे. अमेरिका में खुद इसका विरोध हो रहा है. ट्रंप के इस फैसले के पीछे रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर का हाथ माना जा रहा है, जो लंबे समय से वैक्सीन को लेकर संदेह जताते रहे हैं. अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियन के अध्यक्ष जेसन गोल्डमैन ने इस फैसलों को सनकी और मनमाना बताया है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका के पास पहले से ही अन्य विकसित देशों की तरह यूनिवर्सल वैक्सीन प्रोग्राम नहीं है. ऐसे में टीकों को सीमित करना उन समुदायों के लिए और भी खतरनाक है जिनकी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम है.
भारत में क्या होगा
एक्सपर्ट के मुताबिक ट्रंप की एंटी-वैक्सीन मुहिम का भारत में कोई असर नहीं होगा. भारत जैसी घनी आबादी वाले देश में टीकाकरण ही बीमारियों को फैलने से रोकने का एकमात्र तरीका है. भारत में सरकारी टीके मुफ्त हैं. अगर इसे डॉक्टर से चर्चा पर छोड़ा गया, तो गरीब तबका इससे वंचित रह जाएगा और संक्रामक बीमारियों का विस्फोट हो सकता है. टीओआई की खबर में नोएडा स्थित मदरहुड हॉस्पिटल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वैक्सीन नहीं देने से बच्चे खसरा, पोलियो, काली खांसी, मेनिनजाइटिस और निमोनिया जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में भी कुछ टीका अनिवार्य टीका के रूप में शामिल नहीं है. लेकिन तब भी यह लोगों की जान बचा सकता है. मेनिनजाइटिस जैसी बीमारियां पैरालिसिस और ब्रेन डैमेज का कारण बन सकती हैं. डॉ. गुप्ता का कहना है कि माता-पिता को हल्के दुष्प्रभावों जैसे बुखार या दर्द से घबराकर जीवन रक्षक टीकों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए.
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Lakshmi Narayan
18 साल से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा। लक्ष्मी नारायण ने अपने लंबे करियर में डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक के विभिन्...और पढ़ें
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January 19, 2026, 15:36 IST
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