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अपर्णा यादव का सपा में असहज अनुभव और मुलायम परिवार से वैचारिक मतभेद
Hindustan
January 20, 2026•2 days ago

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प्रतीक यादव ने पत्नी अपर्णा यादव पर स्वार्थी और परिवार तोड़ने का आरोप लगाते हुए तलाक का ऐलान किया है। अपर्णा के सपा में रहते हुए भी अलग विचारधारा और बयानों से मुलायम परिवार कई बार असहज हुआ। 2014 में स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ से शुरू हुई वैचारिक दूरी 2022 में भाजपा में शामिल होने तक बढ़ी, जिससे रिश्तों में कड़वाहट आ गई।
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव से तलाक का ऐलान कर दिया है। अपर्णा पर स्वार्थी, परिवार को तोड़ने वाली महिला समेत कई आरोप लगाए हैं। यहां तक कह दिया कि अपर्णा से शादी करना मेरी बदकिस्मती थी। प्रतीक के एक के बाद एक दो पोस्ट के जरिए सामने आए इन आरोपों के बाद हलचल मची हुई है। इन आरोपों पर कोई भी कुछ खुलकर तो नहीं बोल रहा लेकिन पिछले 12 साल की अपर्णा की कार्यशैली और बयानों को देखें तो पूरा मुलायम परिवार कई बार असहज हुआ है। सपा में रहते हुए भी अलग ट्रैक दिखाई देता रहा है। मुलायम परिवार के साथ वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं।
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अपर्णा-प्रतीक का दो दशक पुराना रिश्ता
अपर्णा यादव और प्रतीक का करीब दो दशक पुराना रिश्ता है। दोनों की मुलाकात लखनऊ के लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल में हुई थी। अपर्णा के पिता वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह बिष्ट और मुलायम सिंह यादव पुराने परिचित थे। प्रतीक और अपर्णा ने लगभग 8 साल लंबे रिश्ते को फरवरी 2012 में शादी में बदल दिया। सैफई में भव्य समारोह के साथ शादी हुई। यह वह दौर था जब यूपी में सपा की लहर थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने जा रहे थे।
पहली बार जब अपर्णा ने परिवार से अलग राह पकड़ी
अपर्णा ने पहली बार 2014-15 के दौरान सुर्खियां बटोरीं, जब उन्होंने सपा की आधिकारिक लाइन से अलग हटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की तारीफ की थी। इसके बाद पीएम मोदी के साथ उनकी एक सेल्फी ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने खुलेआम योगी आदित्यनाथ को अपना बड़ा भाई बताया और अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख का चंदा देकर साफ कर दिया कि उनकी विचारधारा सपा से अलग हो चुकी है।
परिवार से बढ़ती दूरियां और विरोध का मोर्चा
अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच 2017 में हुए वैचारिक मतभेद के दौरान अपर्णा की स्थिति असहज हो गई। अपर्णा की सास साधना गुप्ता पर अखिलेश खेमे ने परिवार तोड़ने के आरोप लगाए, जिससे दूरियां और बढ़ गईं। 2017 में लखनऊ कैंट से चुनाव हारने के बाद अपर्णा को लगा कि सपा में उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। आखिरकार, जनवरी 2022 में उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। प्रतीक और अपर्णा के बच्चे और अखिलेश यादव के बच्चे अक्सर पारिवारिक समारोहों में साथ देखे जाते रहे हैं, जिससे यह संदेश जाता रहा कि बच्चों के स्तर पर कड़वाहट नहीं है।
प्रतीक ने कभी खुलकर विरोध नहीं किया
प्रतीक यादव हमेशा लो-प्रोफाइल रहे हैं। उन्होंने अपर्णा के राजनीति में जाने और भाजपा में शामिल होने का कभी विरोध नहीं किया, बल्कि हमेशा एक बैलेंस बनाए रखा। हालांकि, हालिया पोस्ट में प्रतीक के नाम से लिखा गया कि उनकी मानसिक स्वास्थ्य खराब है और अपर्णा को इसकी फिक्र नहीं है।
साथ चलते रहे विवाद:
-आरक्षण विवाद: अपर्णा ने जातिगत आरक्षण का विरोध कर सवर्णों के पक्ष में बयान दिया था
-2017 के विधानसभा चुनाव हारने और 2022 में अपर्णा के भाजपा में शामिल होने से दूरी बढ़ी
-अपर्णा यादव ने परिवार के राजनीतिक फैसलों पर असहमति जताई
-अपर्णा ने 2014 में सपा कार्यकारिणी में राजनीतिक मंच पर पहली बार परिवार से इतर बोलीं
-परिवार के खिलाफ उन्होंने भाजपा की नीतियों का समर्थन कर मोर्चा खोला, जिसे प्रतीक ने परिवार तोड़ने वाला बताया।
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