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एंटीबायोटिक का अत्यधिक सेवन: युवक की आँखों की रोशनी छिन गई
Jagran
January 19, 2026•3 days ago

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मुजफ्फरनगर में एक युवक की टीबी के इलाज के दौरान अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से आंखों की रोशनी चली गई। छह महीने तक पांच गोलियां रोजाना लेने के कारण 35 वर्षीय अनुज कुमार अंधेपन का शिकार हुए। डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों को दवा से होने वाली किसी भी दिक्कत की सूचना तुरंत देनी चाहिए ताकि समय पर बदलाव किया जा सके।
संवाद सहयोगी, जागरण, मुजफ्फरनगर। इलाज के नाम पर खिलाई जा रही अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाएं बीमारी ठीक करने के बजाय खतरनाक परिणाम दे रही हैं। उत्तरी रामपुरी निवासी युवक के साथ भी ऐसा ही हुआ। वर्ष 2022 में टीबी के इलाज के दौरान लगातार छह महीने तक एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक सेवन की वजह से उनकी आंखों की रोशनी चली गई और एक कामकाजी युवक को आजीवन संघर्ष के रास्ते पर धकेल दिया। उधर, डाक्टरों का कहना है कि अगर मरीज को कोई दिक्कत हो रही है तो तुरंत बताएं, जिससे दवा में परिवर्तन किया जा सके।
शहर के उत्तरी रामपुरी में शाहबुद्दीनपुर रोड पर रहने वाले 35 वर्षीय अनुज कुमार पुत्र किशनपाल ने बताया कि वर्ष 2022 में वह टीबी (क्षय रोग) से पीड़ित हुए थे। उनके फेफड़ों में पानी था। उन्होंने जिला चिकित्सालय के जिला क्षय रोग केंद्र में 12 अगस्त 2022 से 26 जनवरी 2023 तक उपचार लिया। इलाज के दौरान उन्हें नियमित रूप से टीबी की दवाएं (एंटीबायोटिक की पांच गोलियां रोजाना) दी गई।
शुरू में इलाज सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन लगभग दो महीने बाद उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगी। इलाज के दौरान इस लक्षण को गंभीरता से नहीं लिया गया और दवाओं का सेवन जारी रहा। नतीजा यह हुआ कि कुछ समय बाद उनकी दोनों आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई। जब उन्होंने आंखों के चिकित्सक को दिखाया तो पता चला कि एंटीबायोटिक दवा का अत्यधिक सेवन की वजह से वह अंधेपन का शिकार हुए है।
उन्होंने बताया कि उन्हें एथेमब्युटोल, आइसोनियाज़िड, पायराज़ीनामाईड, रिफाम्पिसिन साल्ट की एंटीबायोटिक दवाएं दी गई थी। रोजाना पांच गोलियों का सेवन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान उन्हें यह नहीं पता था कि एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक या लंबे समय तक सेवन आंखों की नसों पर गंभीर असर डाल सकता है। जब तक जांच हुई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रोशनी वापस आने की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी है।
क्या खा रहे हैं, इतना भी दिखाई नहीं देता
अनुज के मुताबिक आज की स्थिति यह है कि उन्हें इतना भी दिखाई नहीं देता कि वह क्या खा रहे हैं या उनके सामने कौन खड़ा है। आंखों की रोशनी जाने से उनका पूरा जीवन बदल गया। वर्ष 2022 तक अनुज ट्रांसपोर्ट नगर में एक प्रतिष्ठान में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत थे। नियमित आय थी और परिवार की जिम्मेदारियां वह स्वयं संभाल रहे थे, लेकिन अंधेपन के बाद नौकरी छूट गई और वह पूरी तरह बेरोजगार हो गए। अब कुछ दिनों से उन्होंने डिस्पोजल (प्लेट-कटोरी) बनाने का छोटा-सा काम शुरू किया है।
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