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धक्का-मुक्की पर बोले अखिलेश यादव: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों का दुर्व्यवहार अक्षम्य
Hindustan
January 18, 2026•4 days ago

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प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद शंकराचार्य ने बिना स्नान किए वापसी की। अखिलेश यादव ने इसे अक्षम्य दुर्व्यवहार बताते हुए भाजपा सरकार को दोषी ठहराया। प्रशासन के अनुसार, भीड़ के कारण पालकी ले जाने की अनुमति नहीं थी, जिससे मार्ग अवरुद्ध हुआ और धक्का-मुक्की हुई।
मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में संगम तट पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और पुलिस कर्मियों के बीच बहस हो गई। इसके बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस प्रशासन पर बदसलूकी, शिष्यों के साथ धक्का मुक्की और मारपीट के आरोप लगाए और बिना स्नान किए ही बीच रास्ते से अपनी पालकी अखाड़े में लेकर लौट गए। इस घटनाक्रम को लेकर अब यूपी में सियासत भी गरमाने लगी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
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सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अखिलेश यादव ने लिखा-‘माघमेला क्षेत्र में पिछले साल की तरह ही इस साल फिर से साधु-संतों-भक्तों के साथ हुआ दुर्व्यवहार अक्षम्य है। सदियों से चली आ रही शाही-स्नान की अखंड सनातनी परंपरा में गत वर्ष भी इसी सरकार द्वारा विघ्न डाला गया था। प्रश्न ये है कि ऐसी घटनाएं भाजपा की सरकार में ही क्यों हो रही हैं। मौनी अमावस्या का शाही-स्नान क्या पहली बार हो रहा है। इस अवस्था के लिए भाजपा का कुशासन और नाकाम व्यवस्था ही दोषी है। मुख्य को हर जगह ‘मुख्य’ बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अहंकारी भाजपाई शासन और प्रशासन अपने से बड़ा किसी को नहीं मानता है। अब क्या इसका दोष भी ‘एआई’ पर मढ़ेंगे? यदि उत्तर प्रदेश के गृह सचिव मनमानी कर रहे हैं तो भी गलत है और अगर किसी के निर्देश पर कर रहे हैं तो और भी गलत है। जाँच हो! घोर निंदनीय!’
संगम तट पर जनसैलाब, मौनी अमावस्या पर 3.15 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
माघ मेला के मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर रविवार दोपहर 12 बजे तक तीन करोड़ 15 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। माघ मेला के सबसे बड़े स्नान पर्व पर डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार संगम की ओर बढ़ती रही। माघ मेला के सबसे बड़े स्नान पर्व पर देर रात 12 बजे से संगम में स्नान शुरू हो गया था। घने कोहरे के बीच संगम क्षेत्र के सभी घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई थी।
भोर में तीन बजे से संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भीड़ तेजी से बढ़ने लगी। सुबह आठ बजे तक एक करोड़ तीन लाख श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे। सुबह नौ बजे तक एक करोड़ 50 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। दोपहर से प्रयागराज के रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर वापस लौटने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। संगम के अलावा शहर के गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं की जबर्दस्त भीड़ दिखाई पड़ी।
विवाद पर प्रशासन का पक्ष
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के बाद हुए विवाद के बारे में प्रशासन का कहना है कि वह पालकी रथ पर सवार होकर करीब दो सौ अनुयायियों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर आज करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु वहां थे। महिलाएं और बच्चे भी थे। ऐसे में किसी को भी वाहन या पालकी, रथ आदि से संगम तक जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भी अनुरोध किया गया कि वह पालकी से उतरकर पैदल ही स्नान के लिए जाएं। एक साथ सभी अनुयायियों की बजाए बारी-बारी से जाने का अनुरोध किया गया। अनुरोध के बावजूद वह नहीं माने। उनकी वजह से करीब तीन घंटे तक वापसी मार्ग अवरुद्ध रहा और जनसामान्य को काफी असुविधा हुई। बैरियर भी तोड़ा गया। पुलिस कर्मियों से धक्का मुक्की भी की गई। पुलिस कमिश्नर जोगिन्दर कुमार ने कहा की सीसीटीवी में सब रिकॉर्ड है। इस मामले में जांच के बाद वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
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