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AI सेवाओं के लिए भारत में अमेरिकी भुगतान क्यों? पीटर नवारो का विवादास्पद बयान
Jagran
January 18, 2026•4 days ago

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पूर्व अमेरिकी अधिकारी पीटर नवारो ने भारत पर फिर टिप्पणी की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि अमेरिकी एआई सेवाओं के लिए भारत को भुगतान क्यों कर रहे हैं, जबकि ये प्लेटफॉर्म अमेरिका में विकसित हुए हैं। नवारो ने तर्क दिया कि भारत जैसे देशों को मुफ्त में सेवाएँ दी जा रही हैं। यह उनका भारत विरोधी बयानों का सिलसिला जारी है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी यूजर्स भारत में एआई सेवाओं के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं। नवारो ने तर्क दिया है कि ये एआई प्लेटफॉर्म अमेरिका में बनते हैं, लेकिन भारत और दूसरे देशों को सर्विस देते हैं।
दरअसल नवारो 'रियल अमेरिका वॉयस' चैनल पर व्हाइट हाउस के पूर्व चीफ स्ट्रैटेजिस्ट स्टीव बैनन से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, 'अमेरिकी भारत में एआई के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं। चैटजीपीटी अमेरिकी जमीन पर काम कर रहा है, अमेरिकी बिजली का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन भारत और चीन समेत दुनियाभर में यूजर्स को सर्विस दे रहा है। इस मुद्दे से निपटना होगा।'
भारत के खिलाफ बयान देते रहते हैं नवारो
यह पहली बार नहीं है, जब नवारो ने भारत के खिलाफ बयान दिया हो। इसके पहले वह रूस से क्रूड ऑयल खरीदने पर भारत की कई बार आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत यूक्रेन में रूस की वॉर मशीन को फाइनेंस कर रहा है। वह भारत को टैरिफ का महाराजा भी कहते रहे हैं।
जब ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया था, तब उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं पर आधारित बताया था। एक बार नवारो में दावा किया था कि 'ब्राह्मण' भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफा कमा रहे हैं। भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि हम उनके कुछ गलत बयान देखे हैं और हम उन्हें खारिज करते हैं।
नवारो ने अमेरिकी एग्रीकल्चर लैंड पर विदेशी स्वामित्व पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी समूह कृषि भूमि के वास्तविक मूल्य से दस गुना ज्यादा कर रहे हैं और इससे घरेलू स्तर पर खाने की कीमतें बढ़ सकती हैं।
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