Friday, January 23, 2026
Geopolitics
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70-60 के दशक का अफगानिस्तान: इन तस्वीरों को देखकर चौंक जाएंगे!

AajTak
January 18, 20264 days ago
70-60 के दशक में ऐसा था अफगानिस्तान... इन तस्वीरों को देख यकीन नहीं होगा

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60 और 70 के दशक में अफगानिस्तान की पुरानी तस्वीरें दिखाती हैं कि तब देश आज की तुलना में कहीं अधिक खुला और आधुनिक था। महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से घूमती थीं और शिक्षा प्राप्त करती थीं। तालिबान के सत्ता में आने के बाद से स्थिति नाटकीय रूप से बदल गई है, जिससे देश में प्रतिबंध और अलगाव बढ़ा है।

ईरान वर्तमान में एक इस्लामिक रिपब्लिक है. वहां इस्लाम धर्म के कायदे-कानून के मुताबिक देश चलता है. इसके तहत समाज में कई तरह के परहेज भी हैं और इनके अनुपालन को लेकर वहां मॉरल पुलिसिंग की भी तगड़ी व्यवस्था है. इन दिनों वहां क्या हो रहा है किसी से कुछ छिपा नहीं है. लोग ऐसी शासन व्यवस्था के विरोध में सड़कों पर हैं. ऐसा ही कुछ हाल अफगानिस्तान के तालिबान शासन में भी है. लेकिन, इन दोनों देशों में 60 और 70 के दशक में ऐसे हालात नहीं थे. अफगानिस्तान में लड़के और लड़कियां एक ही कक्षा में पढ़ते थे. (Photo - William Podlich) अफगानिस्तान में भी अन्य देशों की तरह लोगों को अपने तरीके से जीने की आजादी थी. पुरानी तस्वीरों को देखने पर ऐसा लगता है कि आज से 50 साल पहले का अफगानिस्तान आज से कहीं ज्यादा आगे था. इंडिया टुडे में छपी विलियम पोडलिच की तस्वीरों को देखकर 50 साल पहले के अफगानिस्तान को पहचान पाना मुश्किल है. काबुल के इस्तलिफ गांव में खरीदारी के दौरान फोटोग्राफर की बेटी जेन पॉडलिच. (Photo - William Podlich) रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी के अनुसार,पेग पोडलिच का कहना है कि हालांकि एरिजोना और अफगानिस्तान के बीच सांस्कृतिक अंतर थे, फिर भी उनका अनुभव बेहद रोचक रहा. उन्होंने कहा कि लोग हमेशा मिलनसार और मददगार लगते थे. उस समय हालात काफी शांत थे. फोटो में भी कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है. एक विदेशी महिला सुकून से पोज देकर फोटो खिंचवा रही है. (Photo - William Podlich) अफगानिस्तान में तालिबान का उदय 1994 में दक्षिणी अफगान शहर कंधार के आसपास हुआ था. इसमें मूल रूप से तथाकथित "मुजाहिदीन" लड़ाके शामिल थे, जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के समर्थन से 1980 के दशक में सोवियत सेना को खदेड़ दिया था.दो वर्षों के भीतर, तालिबान ने देश के अधिकांश हिस्से पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया और 1996 में इस्लामी कानून की कठोर व्याख्या के साथ एक इस्लामी अमीरात की घोषणा की. 1996 से 2001 तक, तालिबान ने शरिया कानून के एक सख्त संस्करण को लागू किया. इस तस्वीर में पेग पोडलिच (धूप का चश्मा पहने हुए) काबुल से पाकिस्तान की पारिवारिक यात्रा के दौरान बस में सवार है. तब लोग इत्मीनान से इन इलाकों में ऐसे आराम से घूमते थे. (Photo - William Podlich) तब से महिलाओं को ज्यादातर काम करने या पढ़ने से रोक दिया गया था और उन्हें घर में ही रहने के लिए मजबूर किया जाता था. जब तक कि उनके साथ कोई पुरुष अभिभावक न हो. आज भी तालिबान शासन में कुछ ऐसी ही व्यवस्था है. तालिबान के पहले सत्ता पर कब्ज़े से पहले युद्धग्रस्त अफगानिस्तान कभी शांतिपूर्ण देश था. एक ऐसा देश जहां अफगान और विदेशी महिलाएं सड़कों पर खुलेआम सज-धज कर घूम सकती थीं. अफ़गानिस्तान की स्कूली छात्राएं स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद घर लौट रही हैं, जिसे बाद में तालिबान ने प्रतिबंधित कर दिया था. (Photo - William Podlich)

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