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पिता इंजीनियर, मां डॉक्टर, फिर भी रेलवे स्टेशन पर सोया: अभिज्ञान कुंडु की टीम इंडिया तक की कहानी

SportsTak Hindi
January 19, 20263 days ago
पिता इंजीनियर, मां डॉक्टर फिर भी कोच ने रेलवे स्टेशन पर सुलाया, रोज खेली 5000 गेंद, अब बना टीम इंडिया का धाकड़ बल्लेबाज

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अंडर-19 विश्व कप में अभिज्ञान कुंडु ने शानदार प्रदर्शन किया है। इंजीनियर पिता और डॉक्टर मां के बेटे अभिज्ञान ने दो मैचों में महत्वपूर्ण पारियां खेलीं, जिससे टीम इंडिया की जीत सुनिश्चित हुई। वह मुंबई के हैं और 11 साल की उम्र से ही कोच चेतन जाधव से प्रशिक्षण ले रहे हैं।

अंडर 19 वर्ल्ड कप 2026 खेल रही भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अभिज्ञान कुंडु ने अभी कमाल किया है. उन्होंने दो मैच में नाबाद 42 और 80 रन की पारियां खेली हैं जो टीम की जीत में निर्णायक रही. बांग्लादेश के खिलाफ मैच में भारत के बाकी बल्लेबाज जब नाकाम रहे तब कुंडु ने अंगद की तरह पैर जमा दिए. उनकी पारी ही आखिरी में जीत और हार का अंतर साबित हुई. बाएं हाथ का यह विकेटकीपर बल्लेबाज मुंबई से आता है और क्लब व स्कूली क्रिकेट में रनों की बरसात करते हुए भारतीय अंडर 19 टीम का हिस्सा बना है. अभिज्ञान संपन्न परिवार से आते हैं. उनके पिता अभिषेक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में इंजीनियर हैं तो मां डॉक्टर हैं. ये दोनों अभिज्ञान को क्रिकेट का ककहरा सिखाने के लिए नवी मुंबई में चेतन जाधव के पास लेकर गए थे. दी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुंडु दंपती इस बात से परेशान थे कि उनके बच्चे में काफी ऊर्जा है और वह सोता नहीं है. उसे हर समय कुछ न कुछ करना होता था. ऐसे में उन्होंने सोचा कि अगर बच्चे को किसी खेल में डाल दें तो उससे वह थककर सो जाएगा. रमाकांच आचरेकर का शिष्य बना अभिज्ञान का कोच अभिज्ञान के माता-पिता इसी वजह से जाधव के पास गए. वह खुद लेजेंड्री कोच रमाकांत आचरेकर के शिष्य रहे हैं. जाधव ने माता-पिता से साफ कह दिया कि वे तभी अभिज्ञान का दाखिला लेंगे जब उनके सिखाने के तरीके में कोई दखल नहीं दी जाएगी. वह अपने तरीकों से सिखाएंगे और माता-पिता बच्चे के खेल में नहीं घुसेंगे. जाधव ने दी इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, मैं बच्चे को लेने से पहले माता-पिता का इंटरव्यू लेता हूं. मैं उन्हीं खिलाड़ियों को लेता हूं जिनके माता-पिता कामकाजी होते हैं. मुझे उनका दखल नहीं चाहिए होता है. जाधव ने कहा कि अभिज्ञान जब 11 साल का था तब उन्हें लग गया था कि इस बच्चे में कुछ खास है. उन्होंने बताया, मैं क्लब क्रिकेट खेल रहा था और उसे एक बार अपने साथ ओपन करने के लिए ले गया. वह अपने से बड़े गेंदबाजों से भी डरा नहीं. वह पूरी तरह से फोक्स्ड था. तब मुझे लगा कि वह बढ़िया खिलाड़ी है.

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