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₹658 करोड़ के फर्जी ITC घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन!
AajTak
January 20, 2026•2 days ago

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹658 करोड़ के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले में बड़ा एक्शन लिया है। झारखंड, मणिपुर, कोलकाता सहित कई राज्यों में छापेमारी की गई है। बिना सामान सप्लाई के फर्जी बिलों के आधार पर ITC का दावा किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। इस मामले में 58 शेल कंपनियों का जाल सामने आया है।
ED Raid in GST Fraud Case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है. यह घोटाला करीब ₹658 करोड़ का बताया जा रहा है. इस मामले में झारखंड, मणिपुर, कोलकाता समेत कई राज्यों में एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. ED की टीमें संदिग्ध व्यक्तियों और कंपनियों के ठिकानों पर दस्तावेज़ों और डिजिटल सबूतों की जांच कर रही हैं. यह कार्रवाई देश में अब तक सामने आए बड़े GST घोटालों में से एक मानी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है.
इटानगर यूनिट कर रही है अगुवाई
इस पूरे ऑपरेशन की अगुवाई ED की इटानगर यूनिट कर रही है. स्थानीय पुलिस और अन्य राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर यह संयुक्त कार्रवाई की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क को एक साथ तोड़ने के लिए यह रणनीति अपनाई गई है. कई फर्मों और व्यक्तियों के ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी से अहम सुराग मिलने की उम्मीद है. ED का फोकस इस बात पर है कि फर्जी ITC के जरिए पैसे कैसे घुमाए गए.
बिना सामान सप्लाई के फर्जी बिल
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले में बिना किसी वास्तविक सामान या सेवा की आपूर्ति किए फर्जी इनवॉइस बनाए गए. इन्हीं फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया. इस तरह के फर्जी ITC से न केवल सरकार को टैक्स नुकसान होता है, बल्कि इसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में भी किया जाता है. जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में शेल कंपनियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ.
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FIR से शुरू हुई जांच की कहानी
इस मामले की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश के इटानगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से हुई. FIR में राकेश शर्मा और आशुतोष कुमार झा समेत अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है, इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और दस्तावेज़ों की जालसाजी के गंभीर आरोप हैं. पुलिस जांच के बाद मामला ED तक पहुंचा, जहां मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से इस मामले की पड़ताल शुरू की गई.
गैर-मौजूद कंपनी के नाम पर घोटाला
शिकायत के मुताबिक, M/s सिद्धि विनायक ट्रेड मर्चेंट्स नाम की एक गैर-मौजूद कंपनी के जरिए यह घोटाला अंजाम दिया गया. इस फर्म ने करीब ₹658.55 करोड़ के फर्जी इनवॉइस के आधार पर ₹99.31 करोड़ का ITC हासिल किया. कंपनी का GSTIN भी जांच के दायरे में है. अधिकारियों का कहना है कि कागज़ों में कंपनी मौजूद थी, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उसका कोई अस्तित्व नहीं मिला.
कई राज्यों में 58 शेल कंपनियों का जाल
जांच में खुलासा हुआ है कि इस घोटाले में कुल 58 शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया. ये कंपनियां अलग-अलग राज्यों में फैली हुई थीं और आपस में लेन-देन दिखाया गया. इन शेल एंटिटीज़ के जरिए फर्जी बिलिंग कर ITC को आगे ट्रांसफर किया गया. ED अब इन कंपनियों के डायरेक्टर्स, बैंक खातों और लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है.
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अपराध की कमाई पर नजर
ED अब फर्जी ITC की लेयरिंग और उससे बने अपराध की कमाई का पता लगा रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह पैसा कई स्तरों से घुमाकर वैध दिखाने की कोशिश की गई. जांच एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.
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