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भारत के 114 राफेल जेट: क्या चीनी J-35 स्टील्थ जेट को दे पाएंगे मात?

Navbharat Times
January 20, 20262 days ago
चीनी J-35 स्टील्थ जेट भी भारत के 114 राफेल से नहीं कर पाएगा मुकाबला, पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने क्‍यों दी चेतावनी

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पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत द्वारा 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद पाकिस्तान वायुसेना के लिए चिंता का विषय है। राफेल विमानों के सुचारू संचालन और नेटवर्क में एकीकरण से भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी J-35 स्टील्थ जेट भी राफेल का प्रभावी मुकाबला नहीं कर पाएंगे।

इस्लामाबाद: भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए अगले महीने समझौता कर सकता है। भारत के इस संभावित सौदे को लेकर पाकिस्तान डरा हुआ है। पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपर्ट्स भारत के इस महाडील पर चर्चा कर रहे हैं और इस्लामाबाद के लिए 'चिंता की बात' बता रहे हैं। पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपर्ट बिलाल खान ने भारत के संभावित 114 राफेल सौदे को 'पाकिस्तान एयरफोर्स के लिए चिंताजनक संकेत' बताया है। बिलाल खान ने तर्क दिया है कि असली चुनौती सिर्फ भारतीय वायुसेना के बेड़े में 114 एडवांस राफेल का जुड़ना ही नहीं है, बल्कि इससे ज्यादा चिंताजनक बात उनका मजबूती और कुशलता के साथ मैनेजमेंट और गहरे नेटवर्क में इंटीग्रेशन है, जो पाकिस्तान एयरफोर्स के लिए टेंशन की बात होगी। बिलाल खान ने भारत के 114 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को भारतीय वायुसेना के लिए बहुत बड़ा बदलाव बताया है। उन्होंने कहा है कि एक कॉमन, मॉडर्न मल्टीरोल फाइटर के इर्द-गिर्द बनी फोर्स स्ट्रक्चर भारत को ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और ऑपरेशनल डॉक्ट्रिन को बेहतर बनाने में मदद करेगी। इस सौदे के बाद भारतीय वायुसेना लंबे समय से चली आ रही लड़ाकू विमानों की समस्या से निजात पा लेगी और उसकी संख्यात्मक श्रेष्ठता का असर युद्ध के मैदान में दिखेगा, जहां वो अपनी असली ताकत का प्रदर्शन कर पाएगी।भारत के 114 राफेल सौदे से क्यों डरा है पाकिस्तान? बिलाल खान ने कहा है कि पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान एयरफोर्स ने, भारतीय वायुसेना की मजबूत ताकत और ज्यादा लड़ाकू विमानों को देखते हुए बेहतर ट्रेनिंग, स्टैंडर्ड नेटवर्क इंटीग्रेशन पर भरोसा दिखाया है, लेकिन भारतीय वायुसेना के पास अगर इतने नये एडवांस लड़ाकू विमान आते हैं तो पाकिस्तान एयरफोर्स ने अगर कुछ बढ़त बनाया है, तो वो खत्म हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि भारतीय वायुसेना के पास करीब करीब 200 राफेल फाइटर जेट का होना, सौ से ज्यादा तेजस लड़ाकू विमान और मॉडर्न Su-30MKI लड़ाकू विमानों का होना, पाकिस्तान एयरफोर्स को बुनियादी स्तर पर अपने हवाई युद्ध के बारे में फिर से सोचने को मजबूर करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी फोर्स भारत को एयर डिफेंस, स्ट्राइक और आक्रामक काउंटर-एयर मिशन में बेजोड़ गहराई, सहनशक्ति और लचीलापन देगी। क्या J-35 खरीदकर राफेल को काउंटर कर पाएगा पाकिस्तान? बिलाल खान ने उन विचारों को भी खारिज किया है, जिसमें भारतीय राफेल को काउंटर करने के लिए चीन से J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की बात की गई है। उन्होंने कहा कि अगर ये खरीद होती भी है, तो इसे राफेल का सीधा जवाब नहीं माना जाएगा। बल्कि इसे एक भरोसेमंद डीप-स्ट्राइक स्टील्थ प्लेटफॉर्म के रूप में एक लंबे समय से चली आ रही और ऐतिहासिक रूप से नकारी गई क्षमता की कमी को पूरा करने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने लिखा है कि "राफेल सिर्फ एक फाइटर नहीं है, बल्कि यह सेंसर, हथियारों और डेटा लिंक के एक बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा है।" उन्होंने चेतावनी दी है कि "भारत के विमानों की बराबरी करने की कोशिश करना पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से गलत तरीका होगा।" उन्होंने आकलन किया है कि लड़ाकू विमानों की संख्या के आधार पर पाकिस्तान, भारतीय वायुसेना का मुकाबला नहीं कर पाएगा। बल्कि पाकिस्तान को एक अलग फोर्स एम्प्लॉयमेंट मॉडल की ओर मुड़ना होगा। उसने अपने एयर डिफेंस नेटवर्क का विस्तार करना होगा, जिसमें मॉडर्न AESA रडार और लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस बड़ी संख्या में JF-17 फाइटर शामिल होंगे। इसके अलावा उन्होंने UAV युद्ध की तरफ पाकिस्तान को जाने की सलाह दी है। वहीं, लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के जरिए भारत के खिलाफ डेटरेंट क्षमता बढ़ाने की सलाह दी है। लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद, नवभारत टाइम्स में इंटरनेशनल अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं। जियो-पॉलिटिक्स और डिफेंस पर लिखते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 सालों का अनुभव है। अपने कैरियर की शुरूआती दिनों में उन्होंने क्राइम बीट में काम किया और ग्राउंड रिपोर्टिंग की। उन्होंने दो लोकसभा चुनाव को कवर किया है। इसके बाद वो इंटरनेशनल अफेयर्स की तरफ आ गये, जहां उन्होंने अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के साथ साथ कई देशों के इलेक्शन और वहां की राजनीति को कवर किया है। डिफेंस सेक्टर, हथियारों की खरीद बिक्री और अलग अलग देशों के बीच होने वाले संघर्ष पर लगातार लिखते रहते हैं। वो ज़ी मीडिया समेत कई प्रतिष्ठित संस्थान में काम कर चुके हैं। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन पर वो डिफेंस और जियो-पॉलिटिक्स के एक्सपर्ट्स, डिप्लोमेट्स और सैन्य अधिकारियों से बात करते रहते हैं। इस समय वो 'बॉर्डर-डिफेंस' नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू भी करते हैं, जो डिफेंस पर आधारित है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई है।... और पढ़ें

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