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10 बेटियों के बाद बेटे का जन्म: जींद के परिवार की खुशी की कहानी

AajTak
January 20, 20262 days ago
38 साल की महिला ने 9 बेटियों के बाद जन्मा बेटा, इंतजार में छोटी बेटियों के नाम रखे थे काफी और माफी

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हरियाणा के जींद में एक परिवार ने 9 बेटियों के बाद 10वें बच्चे के रूप में बेटे को जन्म दिया। 38 वर्षीय मां और नवजात शिशु स्वस्थ हैं। इस घटना ने बेटे की चाहत और समाज में बेटा-बेटी के बीच अंतर करने वाली मानसिकता पर प्रकाश डाला है, जहाँ बेटियों के नाम 'काफी' और 'माफी' रखे गए थे।

कुछ दिन पहले हरियाणा के जींद में 10 बेटियों के बाद बेटे के जन्म की खबर सामने आई थी और अब एक बार फिर ऐसा ही मामला जिले के उचाना कलां से आया है. यह खबर सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि उस सोच को भी उजागर करती है, जहां आज भी बेटे के जन्म को त्योहार और बेटियों को बेटे का इंतजार समझा जाता है. शादी के 24 साल और 9 बेटियों के बाद बेटे का जन्म उचाना कलां निवासी सुरेंद्र के परिवार में शादी के 24 साल और 9 बेटियों के बाद बेटे का जन्म हुआ है. जैसे ही नागरिक अस्पताल में बेटे के जन्म की सूचना मिली, परिवार और रिश्तेदारों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अस्पताल परिसर में मिठाइयां बांटी गईं और जश्न मनाया गया. छोटी बेटियों के नाम काफी और माफी सुरेंद्र की पत्नी रीतू ने 9 बेटियों के बाद 10वें बच्चे के रूप में बेटे को जन्म दिया. परिजनों का कहना है कि सभी भगवान से दुआ कर रहे थे कि इस बार बेटा हो, ताकि बेटियों को भाई मिल सके. यही नहीं, परिवार के दूसरे भाई की भी तीन बेटियां हैं, ऐसे में कुल 12 बहनों को एक भाई मिला है. दो लड़कियों की शादी बीते साल नवंबर में हुई थी. सबसे छोटी बेटी की उम्र 3 साल की है. सबसे बड़ी बेटी की उम्र 21 साल की है. बेटियों के नाम कल्पना, आरती, भारती, खुशी, मानसू, रजनी, रजीव, काफी, माफी हैं. Advertisement बेटे का नाम रखा दिलखुश परिवार की महिलाएं और रिश्तेदार इसे ईश्वर की कृपा बता रहे हैं. बुआ ने बेटे का नाम 'दिलखुश' रखने की घोषणा करते हुए कहा कि 'भगवान ने सबका दिल खुश कर दिया.' नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार 38 वर्षीय रीतू की डिलिवरी सामान्य रही और मां-बेटा दोनों स्वस्थ हैं. डॉक्टरों ने बताया कि पहले 9 डिलिवरी हो चुकी होने के कारण महिला को विशेष निगरानी में रखा गया था. बेटे की चाह, 10 बार नॉर्मल डिलवरी से बनी मां हालांकि यह खुशी भरा माहौल एक सवाल भी छोड़ जाता है- क्या आज भी समाज में बेटी का जन्म स्वीकार्य नहीं है? जहां एक ओर सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बेटे की चाह में एक महिला को 10 बार मां बनना पड़ रहा है. महिला की 10 की 10 डिलीवरी नॉर्मल थीं. यह खबर साफ दिखाती है कि आधुनिक दौर में भी बेटा-बेटी के बीच फर्क करने वाली मानसिकता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. Input: सुनील कुमार ---- समाप्त ----

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